देहरादून में शराब कारोबार को लेकर सामने आए आरोपों के बीच जिला प्रशासन ने शराब दुकानों के खिलाफ देर रात बड़ा चेकिंग अभियान चलाया।
1 अक्टूबर को अलग-अलग मजिस्ट्रेट टीमों ने शहर की कई दुकानों का निरीक्षण किया।
प्रशासन के मुताबिक, शराब दुकानों पर ओवररेटिंग और दूसरी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
जांच के दौरान ISBT, प्रेमनगर, जाखन और राजपुर रोड समेत कई क्षेत्रों की दुकानों में नियमों का पालन नहीं मिला।
ISBT दुकान में ओवररेटिंग की पुष्टि
ISBT स्थित शराब दुकान की जांच में निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत सही पाई गई।
टीम को दुकान में रखी 42 बोतलों के बैच नंबर उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं मिले।
जांच के दौरान अनधिकृत सेल्समैन भी मिले। दुकान पर निर्धारित रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं थी।
प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता माना है।
प्रेमनगर की एक दुकान में स्टॉक रजिस्टर अपडेट नहीं मिला। यहां भी अनधिकृत सेल्समैन पाए गए।
जाखन और राजपुर रोड की दुकानों में स्टॉक रजिस्टर, रेट लिस्ट और आबकारी विभाग का शिकायत नंबर प्रदर्शित नहीं होने जैसी कमियां मिलीं।
कुछ दिन पहले कारोबारी ने लगाए थे आरोप
इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले 27 सितंबर को शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा ने अरुण तोमर पर गंभीर आरोप लगाए थे।
मल्होत्रा ने कथित तौर पर शराब कारोबारियों से रकम मांगने, दबाव बनाने और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे।
उन्होंने यह भी दावा किया था कि अरुण तोमर के प्रभाव के कारण आबकारी अधिकारियों के जरिए
दुकानों पर कार्रवाई कराई जाती थी और कथित रकम नहीं देने पर ओवररेटिंग के चालान का दबाव बनाया जाता था।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मल्होत्रा ने खुद भी यह स्पष्ट नहीं किया था कि अरुण तोमर को किसी उच्च स्तर से संरक्षण प्राप्त है या नहीं।
प्रशासन ने कार्रवाई का कारण बताया शिकायतों को
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर हुई कार्रवाई का आधिकारिक कारण शराब दुकानों में ओवररेटिंग और अन्य नियमों के उल्लंघन की शिकायतें बताया गया है।
कार्रवाई का नेतृत्व सिटी मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, एसडीएम मुख्यालय रविंद्र ज्वांठा और अन्य अधिकारियों ने किया।
डीएम ने कहा कि निर्धारित कीमत से अधिक पर शराब की बिक्री, अनधिकृत कर्मचारियों से बिक्री
और रिकॉर्ड में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने आगे भी औचक निरीक्षण जारी रखने की बात कही है।
फिलहाल, 27 सितंबर को लगाए गए आरोपों और 1 अक्टूबर की प्रशासनिक कार्रवाई के बीच कोई सीधा संबंध प्रशासन ने नहीं बताया है।
इसलिए दोनों घटनाओं को जोड़कर निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच और कार्रवाई के परिणाम का इंतजार करना होगा।















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