महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित भीमाशंकर मठ में हिमवत केदार बैराग्यपीठ के 324वें जगद्गुरु भीमाशंकर लिंग महाराज
के पट्टाभिषेक रजत जयंती समारोह के अंतर्गत आयोजित आठ दिवसीय विश्व शांति यज्ञ का भव्य एवं भावपूर्ण समापन हुआ।
देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और शिष्यों की उपस्थिति में यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
स्वास्थ्य कारणों से रावल भीमाशंकर लिंग ने पद से विराम लिया
समापन अवसर पर 70 वर्षीय केदार जगद्गुरु रावल भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महाराज ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से विराम लेने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि केदारपीठ की परंपरा, मर्यादा और निरंतरता बनाए रखने के लिए समय रहते उत्तराधिकारी का चयन अत्यंत आवश्यक है।
शिवाचार्य शांति लिंग महाराज बने केदारपीठ के नए जगद्गुरु रावल
इसी क्रम में रावल भीमाशंकर लिंग शिवाचार्य महाराज ने अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग महाराज (केदार लिंग) को केदारपीठ का नया जगद्गुरु रावल नामित किया।
इस पावन अवसर पर उन्हें माला एवं शाल ओढ़ाकर विधिवत दीक्षा प्रदान की गई। संत समाज ने इस निर्णय का सर्वसम्मति से स्वागत किया।
महाशिवरात्रि पर होगी औपचारिक घोषणा
जगद्गुरु रावल भीमाशंकर लिंग ने बताया कि इस निर्णय की औपचारिक घोषणा 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पंचकेदारों की गद्दीस्थली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाएगी।
इस दौरान स्थानीय हक-हकूकधारी और परंपरागत प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
325वें केदार जगद्गुरु का होगा भव्य पट्टाभिषेक
केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के पश्चात वीरशैव सम्प्रदाय के पांच पीठों के पंचाचार्यों द्वारा सर्वसम्मति से 325वें केदार जगद्गुरु के रूप में शिवाचार्य शांति लिंग महाराज का भव्य पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा।
विधिवत वैदिक अनुष्ठानों के साथ वे जगद्गुरु सिंहासन पर आसीन होंगे।
केदारनाथ धाम की परंपराओं के संरक्षक होते हैं रावल
केदारनाथ धाम पंचकेदारों में सर्वोच्च और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। यहां की पूजा-पद्धति दक्षिण भारतीय वीरशैव परंपरा के अनुसार संपन्न होती है।
रावल पद पर आसीन व्यक्ति धाम की धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों का सर्वोच्च संरक्षक माना जाता है।
श्रद्धालुओं में उत्साह, परंपरा को मिलेगी नई दिशा
महाशिवरात्रि पर 325वें केदार रावल की घोषणा को लेकर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह है।
माना जा रहा है कि यह परिवर्तन केदारनाथ धाम की आध्यात्मिक परंपरा को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा।
















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