श्रीनगर से 128 किमी तय कर रूड़की पहुंचीं महिलाएं
8 मार्च को दिल्ली में राष्ट्रपति से मिलने का लक्ष्य
एलयूसीसी पीड़ित महिलाओं की न्याय यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।
श्रीनगर से दिल्ली की ओर पैदल निकल चुकी महिलाएं अब तक लगभग
128 किमी की दूरी तय कर रूड़की पहुंच चुकी हैं।
लंबी पदयात्रा के कारण उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं और सूजन भी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं।
इस काफिले में करीब 10 महिलाएं लगातार साथ चल रही हैं।
जहां-जहां यह समूह पहुंच रहा है, स्थानीय लोग उनका स्वागत कर रहे हैं और नैतिक समर्थन दे रहे हैं।
कई स्थानों पर महिलाओं का सम्मान भी किया गया।
“ये छाले इतिहास लिखने जा रहे हैं”: सरस्वती देवी
पदयात्रा में शामिल सरस्वती देवी ने कहा, “ये पैरों के छाले इतिहास लिखने जा रहे हैं। हम मां-बेटी को उनका अधिकार दिलाने और सत्ता को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाने के लिए निकले हैं।”
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई का नहीं, बल्कि सम्मान और न्याय का है।
8 मार्च को दिल्ली पहुंचने का लक्ष्य
गौरतलब है कि 8 मार्च, ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर महिलाएं
लगभग 347 किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली पहुंचने का संकल्प लेकर चल रही हैं।
वहां वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं और मांगें रखना चाहती हैं।
महिलाओं का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
यह पदयात्रा अब केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार और आत्मसम्मान की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है।
इस न्याय कूच में उनके साथ रेखा उनियाल, प्रभा पुरोहित, रजनी, सुशीला, संगीता ढौंडियाल और भरत सिंह रावत भी मजबूती से कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं।
















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