रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

रंगों का कोरस

डा अतुल शर्मा

चित्रों का रंग
और होली के रंग,
रंग जमा देने वाले ढोल-दमाऊ
और लोक गीतों का रंग।
डौंर-थाली का सम्मोहन,
रह-गीत की भाषा का अपना रंग,
पर सुरों का अपना।
हर ताल अलग-अलग, पर रिदम के साथ निभाह एक,
एक रंग जमा।

रंगों का एक दिन,
रंग भरे सब दिन।

पर्वतों के झरनों, नदियों के,
श्रम के, जोखिम के, त्रासदियों के,
दुख के, खुशी के, मौन का रंग, आवाज़ का भी।

झूठ के अलग रंग,
सच के अलग।

प्रेम का रंग
हर कहीं।

और एक रंग डरा-डरा,
एक सहमा-सहमा,
एक डरा देने वाला रंग।

रंगों की नदी में जीवन,
रंगों के पहाड़ों में, समुद्र में, आकाश में, मिट्टी में रंग।
सड़कों पर, पगडंडियों के ऊपर और नीचे,
घास से ढकी गुफा का रंग,
पानी और आग का रंग।

एक साथ यह जीवन
रंगों का कोरस है।

https://regionalreporter.in/demonstration-by-the-pankhanda-community-at-jyotirmath/

https://youtu.be/7S6Wz1SiKak?si=_y_XaW8ZnGJotpqy
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लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.

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