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सरोकारों से साक्षात्कार

पदयात्रा की गूंज राष्ट्रीय फलक तक: स्वागत के बजाय श्रीनगर थाने में पहुंचीं सरस्वती देवी

370 किमी पदयात्रा, दर्द और संघर्ष की दास्तान

‘एलयूसीसी पीड़ित’ महिलाओं की आवाज दिल्ली तक, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

श्रीनगर से दिल्ली तक न्याय की गुहार, महिला आंदोलन ने खोली प्रशासनिक संवेदनहीनता की परतें

नगर के पीपल चोरी चौराहे से 25 फरवरी को शुरू हुई 370 किलोमीटर लंबी पदयात्रा

अब उत्तराखंड की सबसे चर्चित जनआंदोलनों में से एक बन गई है।

‘एलयूसीसी पीड़ित’ महिलाओं के न्याय की मांग को लेकर निकली इस यात्रा ने प्रशासनिक व्यवस्था

और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

धूप में रोका, रात में छोड़ा… फिर भी नहीं टूटा हौसला

पदयात्रा की शुरुआत के कुछ ही घंटे बाद महिलाओं को नीत क्षेत्र के पास महिला थाने पर रोक दिया गया।

कारण बताया गया-ट्रैफिक बाधित हो रहा है।

तेज धूप में घंटों सड़क किनारे बैठाए जाने के बाद रात में उन्हें छोड़ दिया गया।

लेकिन हौसला ऐसा कि उसी रात महिलाएं 45 किमी दूर कौड़ियाला तक पहुंच गईं।

सरस्वती देवी के नेतृत्व में संघर्ष

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही सरस्वती देवी 8 महिलाओं के साथ इस लंबी पदयात्रा पर निकलीं।

उनका उद्देश्य साफ था 350 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं की पीड़ा को सड़कों से होते हुए देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाना।

रास्ते में बीमारी, छाले… लेकिन कदम नहीं रुके

यात्रा के दौरान कई बार सरस्वती देवी की तबीयत बिगड़ी, यहां तक कि उन्हें मेरठ के अस्पताल में

भर्ती तक होना पड़ा।

पैरों में छाले, शरीर में तकलीफ लेकिन उनका कहना था“मैं यह यात्रा अधूरी नहीं छोड़ सकती, क्योंकि कई महिलाओं की उम्मीदें मुझसे जुड़ी हैं।”

राष्ट्रपति से मिलने का प्रयास, लेकिन रास्ते में रोक

महिलाओं का लक्ष्य था राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपना।

लेकिन 8 मार्च को बिरला मंदिर के पास ही उन्हें रोक दिया गया और सचिवालय ले जाया गया।

आश्वासन मिला कि बाद में मुलाकात कराई जाएगी-जो अब तक पूरी नहीं हुई।

गढ़वाल सांसद से मुलाकात पर विवाद

6 मार्च को महिलाओं की मुलाकात अनिल बलूनी से हुई।

महिलाओं का आरोप है कि 300 किमी चलकर पहुंचीं महिलाओं को वहां

पानी तक नहीं पूछा गया और बातचीत केवल CBI जांच के आश्वासन तक सीमित रही।

सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद, FIR की धमकी

जब सरस्वती देवी ने अपने सोशल मीडिया पर नेताओं के खिलाफ टिप्पणी की,

तो कुछ स्थानीय पदाधिकारियों ने उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए FIR की चेतावनी तक दे दी।

इससे आंदोलन और भड़क गया।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, समर्थन में पहुंचे बड़े नेता

17 मार्च को जंतर मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कई नेता शामिल हुए और महिलाओं के संघर्ष को समर्थन दिया।

घर-परिवार भी दबाव में, लेकिन संघर्ष जारी

18 मार्च को सरस्वती देवी श्रीनगर लौटीं।

उन्होंने बताया कि उनके परिवार पर भी दबाव है-बच्चा डरा हुआ है, घर में बुजुर्ग बीमार हैं,

खुद भी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं, फिर भी उनका संकल्प अडिग है।

मुख्य मांगें

  • एलयूसीसी पीड़ित महिलाओं को जल्द न्याय
  • चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP नामों का खुलासा
  • महिला सुरक्षा के लिए ठोस नीति
  • CBI जांच में तेजी

यह मामला केवल एक घोटाले या एक घटना का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है।

जब 370 किमी पैदल चलने वाली महिलाओं को रास्ते में रोका जाता है,

उनकी बात नहीं सुनी जाती तो यह लोकतंत्र की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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