नेहा से दुर्व्यवहार की निंदा और केतन को न्याय की मांग
भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के मौके पर देहरादून के दीन दयाल उपाध्याय पार्क में सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से सभा का आयोजन किया गया।
सभा में स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को याद करने के साथ-साथ रांची में नेहा बोरा के साथ स्याही फेंकने की घटना की निंदा की गई।
इसके अलावा टिहरी के केतन लाल को न्याय दिलाने की मांग भी उठाई गई।
सभा में वक्ताओं ने मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों समेत युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।
आंदोलनकारी शक्तियों से एकजुट होने की अपील
एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा ने कहा कि देश एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रहा है,
जहां सत्ता हर स्तर पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आंदोलनकारी शक्तियों से सतर्क और एकजुट रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि युवाओं ने दिल्ली से जिस आंदोलन की शुरुआत की है, उसकी आवाज को आने वाले वर्षों तक बनाए रखने की जरूरत है।
सर्वोदयी कार्यकर्ता भुवन पाठक ने भी आजादी के आंदोलन को याद करते हुए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी बात रखी।

सशक्त भू-कानून को लेकर भी उठे सवाल
भुवन पाठक ने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता की ओर से लैंड जिहाद, लव जिहाद और डेमोग्राफी बदलाव जैसे मुद्दों का नैरेटिव बनाया जा रहा है।
उन्होंने राज्य में सशक्त भू-कानून को लेकर भी सवाल उठाए और पौड़ी में जमीन की खरीद-फरोख्त का उदाहरण देते हुए जांच की मांग की।
पेपर लीक को लेकर सरकार पर निशाना
सीपीआई माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार और भाजपा-आरएसएस पर निशाना साधा।
उन्होंने रांची में नेहा बोरा के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध करने वालों के खिलाफ दबाव बनाया जा रहा है।
हालांकि, ये सभी आरोप सभा में वक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं।

कांवड़ यात्रा को लेकर भी उठाए सवाल
आइसा के अंकित उछोली ने कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था और अराजकता का मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कांवड़ यात्रा के नाम पर हुड़दंग करने वालों को संरक्षण दे रही है।
वहीं, उत्तराखंड इंसानियत मंच के प्रो. एन. राघवेन्द्र ने कहा कि सत्ता के विरोध में आवाज उठाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संख्या कम होने के बावजूद लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाते रहना चाहिए।
सभा में कई सामाजिक कार्यकर्ता और नेता रहे मौजूद
ईश्वर पाल शर्मा ने भी सरकार पर दमन का आरोप लगाया और युवाओं की सक्रिय भूमिका की जरूरत बताई।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति के कमलेश खंतवाल ने कहा कि जनता लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी।
सभा का संचालन उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट ने किया।
उन्होंने तिरंगा यात्रा को लेकर भी टिप्पणी की और राजनीतिक दलों पर निशाना साधा।
कार्यक्रम में सीपीआई के डॉ. रवि चोपड़ा, धर्मानंद लखेड़ा, एक्टिविस्ट राजू सिंह, स्वाति नेगी, नितिन काला, प्रदीप सती और धर्मेंद्र जोशी समेत कई लोग मौजूद रहे।
सभा की शुरुआत जनगीत से हुई, जबकि समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।















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