बीडीओ खिर्सू को सौंपा ज्ञापन
विकासखंड खिर्सू के अंतर्गत मनरेगा कर्मियों की समस्याओं और त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में प्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरजीत सिंह बिष्ट के नेतृत्व में एक ज्ञापन खंड विकास अधिकारी (BDO) को सौंपा गया।
पत्र के माध्यम से सरकार से मनरेगा कर्मियों के लिए ठोस नीति बनाने और पंचायत सदस्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग की गई है।
मनरेगा कर्मियों की स्थिति पर चिंता
ज्ञापन में प्रमुखता से कहा गया है कि मनरेगा के तहत कार्यरत उपकार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर ऑपरेटर, जूनियर इंजीनियर और रोजगार सेवक वर्तमान में केवल दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं।
उन्हें जिला स्तर पर कुल व्यय का मात्र 6 प्रतिशत मानदेय मिलता है, जो आज की महंगाई के समय में जीवन यापन के लिए नाकाफी है। यह ‘लेबर एक्ट’ का भी उल्लंघन है।
प्रमुख मांगें और बिंदु
समान कार्य-समान वेतन: उत्तराखंड सरकार की ‘उपनल’ (UPNL) नियमावली की तर्ज पर मनरेगा कर्मियों के लिए भी एक ठोस नीति बनाई जाए ताकि उन्हें भविष्य की सुरक्षा और उचित वेतन मिल सके।
बजट की निकासी: वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा के रुके हुए ‘सामग्री अंश’ (Material Component) को जल्द मुक्त किया जाए ताकि ग्रामीण विकास के कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
प्रतिनिधियों का सम्मान
पंचायत राज मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में केवल ग्राम प्रधानों को ही नहीं, बल्कि क्षेत्र पंचायत सदस्यों को भी शामिल किया जाए।
उन्हें भी जनता द्वारा चुना जाता है और उनकी भी अपने क्षेत्र के प्रति नैतिक जिम्मेदारी होती है।
इन को भेजी गई प्रतिलिपि
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, पत्र की प्रतियां देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व को भी भेजी गई हैं, जिनमें शामिल हैं
- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
- राजीव रंजन सिंह,पंचायती राज मंत्री, भारत सरकार।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड।
- सतपाल महाराज,पंचायती राज मंत्री, उत्तराखंड।
- डॉ. धन सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

ज्ञापन सौंपने वालों में कुलदीप (प्रधान), सुमन देवी, बलवीर देवी, करिश्मा, नीलम चौहान और रेखा देवी सहित कई ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि शामिल रहे।
















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