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सरोकारों से साक्षात्कार

निजीकरण और श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे संगठन

केंद्र सरकार की नीतियों और स्थानीय जलते मुद्दों को लेकर आज श्रीनगर में विभिन्न श्रमिक और छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

CITU (सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस) और SFI (स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) की श्रीनगर इकाइयों ने संयुक्त रूप से देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया।

श्रम कानूनों और निजीकरण का विरोध

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को ‘मजदूर विरोधी’ बताते हुए इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि इन कानूनों से मजदूरों के यूनियन बनाने और हड़ताल करने के संवैधानिक अधिकार खत्म हो जाएंगे।

इसके साथ ही, रेलवे, रक्षा, बिजली और बीमा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की गई है।

प्रमुख 18 सूत्रीय मांगें:

  • संगठनों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
  • न्यूनतम वेतन: सभी कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह तय किया जाए।
  • पुरानी पेंशन (OPS): नई पेंशन स्कीम (NPS) को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना बहाल हो।
  • अंकिता भंडारी हत्याकांड: अंकिता भंडारी मामले में शामिल ‘VIP’ की तत्काल गिरफ्तारी और सबूत मिटाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
  • शिक्षा का अधिकार: उत्तराखंड में ‘क्लस्टर योजना’ के नाम पर बंद किए जा रहे सरकारी स्कूलों की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
  • रोहित एक्ट: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए ‘रोहित वेमुला एक्ट’ लागू करने की मांग।
  • किसानों को गारंटी: सभी फसलों के लिए एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी दी जाए।
  • स्थानीय मुद्दे: केदारनाथ आपदा 2013 के नियमों को लागू कर आपदा प्रभावितों को राहत दी जाए और वन अधिकार कानून 2006 के तहत मालिकाना हक दिया जाए।

“विकसित भारत” योजना पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने ‘विकसित भारत ग्रामीण आजीविका मिशन गारंटी’ को ग्रामीण मजदूरों के खिलाफ बताया और मनरेगा (MGNREGA) को प्रभावी ढंग से बहाल करने की मांग की।

साथ ही, आंगनवाड़ी, आशा और भोजनमाताओं को ‘कर्मचारी’ का दर्जा देने और समान काम के लिए समान वेतन देने की आवाज बुलंद की गई।

संगठनों की चेतावनी

SFI और CITU के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि इन मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार ने जल्द संज्ञान नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में इकाई अध्यक्ष सवी, इकाई सचिव अंजली और CITU जनपद कमेटी के सदस्य मुख्य रूप से शामिल रहे।

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