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सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: राजनीतिक दलों के अनियंत्रित व्यय पर PIL

कॉमन कॉज और CPIL की याचिका पर सुनवाई, अदालत ने केंद्र व अन्य पक्षों से जवाब मांगा

Supreme Court of India ने राजनीतिक दलों द्वारा अनियंत्रित चुनावी खर्च के मुद्दे पर दायर

जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया है।

यह याचिका Common Cause और Centre for Public Interest Litigation (CPIL) की ओर से दाखिल की गई है।

चीफ़ जस्टिस Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan ने कहा:

  • वर्तमान कानून उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर सीमा तय करता है।
  • लेकिन इन सीमाओं का प्रभावी पालन नहीं होता।
  • यदि कोई व्यक्ति उम्मीदवार की ओर से खर्च करता है, तो उसे उम्मीदवार के खाते में जोड़ा जाता है।
  • परंतु राजनीतिक दलों द्वारा किया गया खर्च उम्मीदवार के खर्च में नहीं जोड़ा जाता।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों के खर्च पर कोई स्पष्ट वैधानिक सीमा नहीं है, जिससे “अनियंत्रित चुनावी खर्च” की स्थिति बनती है।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने पूछा कि यदि किसी उम्मीदवार के मित्र

या समर्थक उसके पक्ष में खर्च करें और उसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(a)) के तहत उचित ठहराएं, तो ऐसे खर्च को नियंत्रित करना कैसे संभव होगा?

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • यदि बाहरी समूह किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार खर्च करें, तो उस पर सीमा कैसे लागू होगी?
  • अधिकतम सीमा तय करने पर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में चुनौती दी जा सकती है।

चुनावी बांड मामले का हवाला

प्रशांत भूषण ने चुनावी बांड प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अनियंत्रित चुनावी खर्च लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है और इसे नियंत्रित करना आवश्यक है।

इसके बाद अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

याचिका में उठाए गए संवैधानिक मुद्दे

याचिका में संविधान के:

  • अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
  • अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता)

के तहत मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला

याचिका में Representation of the People Act, 1951 की धारा 77(1) और चुनाव आचरण नियमों के नियम 90 का उल्लेख करते हुए कहा गया है:

  • उम्मीदवारों के खर्च पर सख्त सीमा है
  • लेकिन राजनीतिक दलों के खर्च पर ऐसी कोई सीमा नहीं है

विशेषज्ञ संस्थाओं की सिफारिशें

याचिका में कहा गया कि विधि आयोग सहित कई विशेषज्ञ निकायों ने राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च को विनियमित करने की सिफारिश की है।

फिर भी अब तक कोई ठोस विधायी या कार्यकारी कदम नहीं उठाया गया।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

याचिकाकर्ताओं ने यूनाइटेड किंगडम का उदाहरण दिया, जहां Political Parties, Elections and Referendums Act

2000 के तहत राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च पर सीमा निर्धारित है और उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।

संसदीय लोकतंत्र पर प्रभाव

याचिका में यह भी कहा गया है कि अनियंत्रित चुनावी खर्च के कारण भारतीय चुनावों में “राष्ट्रपति शैली” (Presidentialisation) का प्रभाव बढ़ रहा है,

जहां भारी धनराशि खर्च कर एक ही नेता को केंद्र में रखकर प्रचार किया जाता है।

यह प्रवृत्ति वेस्टमिंस्टर मॉडल आधारित संसदीय लोकतंत्र की भावना के विपरीत बताई गई है।

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