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उत्तरकाशी: गंगोत्री तक सड़क चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट फिर तेज

भागीरथी इको‑सेन्सिटिव ज़ोन में सड़क विस्तार, 6,800+ पेड़ों पर खतरा, विरोध तेज

गंगोत्री तक सड़क चौड़ीकरण की तैयारी अब तेज़ हो चुकी है।

लेकिन इस रणनीतिक प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के बाद पर्यावरण और सामाजिक चिंताओं ने फिर जोर पकड़ा है क्योंकि प्रस्तावित मार्ग Bhagirathi Eco‑Sensitive Zone (BESZ) के अंतर्गत आता है।

कितने पेड़ों पर असर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 6,822 पेड़ों को चिह्नित किया गया है।

  • इनमें से करीब 4,366 पेड़ों का ट्रांस‑लोकेशन किया जाना है।
  • जबकि बाकी 2,456 पेड़ों को काटना पड़ेगा।

हालांकि, प्रस्तावित ट्रांस‑लोकेशन के लिए लागत लगभग ₹324.44 लाख स्वीकृत की गई है।

इसके अलावा, कटाई की लागत वन विभाग द्वारा वहन की जाएगी।

प्रोजेक्ट क्यों ज़रूरी

सरकार और रक्षा सड़क संस्था (BRO) का तर्क है कि गंगोत्री मार्ग के चौड़ीकरण से—

  • सीमावर्ती क्षेत्र में सेना और आपदा प्रबंधन सुगम होगा,
  • तीर्थयात्रियों एवं आम लोगों की यातायात सुविधा सुधरेगी।

इस Stretch का कुल 20.6 किमी क्षेत्र है, जिसमें 41.92 हेक्टेयर भूमि को

नॉन‑फॉरेस्ट उपयोग के लिए अनुमति दी गई है।

इसके बदले में 76.924 हेक्टेयर भूमि पर वनीकरण (compensatory afforestation) का प्रस्ताव है।

वैज्ञानिकों, पर्यावरण समूहों और स्थानीयों की तीखी आपत्ति

पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों ने चौड़ीकरण की अपनी आपत्तियाँ जताई हैं:

  • उनका कहना है कि BESZ क्षेत्र भूस्खलन और भूजल अस्थिरता के लिए पहले से संवेदनशील है। 2025 में यहां हुई आपदाएं—जैसे धराली भूस्खलन—इस बात की गवाही देती हैं कि बड़े निर्माण इस संवेदनशील इको सिस्टम को भयंकर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
  • एक विशेषज्ञ पैनल ने सुझाव दिया है कि चौड़ीकरण की जगह स्मार्ट, लचीली और आपदा-रोधी योजना अपनाई जाए—जिसमें स्लोप सुरक्षा, न्यूनतम पेड़ काटना और स्थलीय स्थिरता पर खास ध्यान दिया जाए।
  • स्थानीय लोग भी ज़ोर दे रहे हैं कि 기존 सड़क मरम्मत और रखरखाव से यात्राओं और आपातकालीन सेवाओं की सुविधा संभव है—बगैर पर्यावरण को इतना बड़ा नुकसान पहुंचाए।

लेकिन BRO का कहना है कि 2021 में Supreme Court of India (SC) ने

गंगोत्री‑रिसिकेश मार्ग को “रणनीतिक मार्ग” घोषित किया था

और चौड़ीकरण व पुनर्वास की अनुमति दी थी।

इस आधार पर उनका दावा है कि यह कार्य SC की अनुमति और सुरक्षा प्रावधानों के अनुरूप है।

स्थानीय विरोध और संवेदनशीलता का भाव

पर्यावरण कार्यकर्ता, निवासियों और नागरिक समूहों ने इस प्रस्तावित सड़क विस्तारीकरण के

खिलाफ सार्वजनिक आंदोलन शुरू कर दिया है।

कुछ लोग पहले ही पेड़ों पर “रक्षा सूत्र” बांधकर प्रतीकात्मक विरोध जता चुके हैं

और कहा है कि पेड़ों की कटाई से पर्वतीय पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ेगा।

इस बीच, भूमि‑स्वीकार्य प्रस्तावों (road proposals) को राज्य सरकार द्वारा “सशर्त हरी झंडी” दी गई है,

जिससे 88 गांवों में विकास का रास्ता खुला है।

लेकिन पर्यावरणविदों ने चेताया है कि यदि सुरक्षा व

भू‑संतुलन के वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए, तो हिमालय में ‘प्राकृतिक आपदा’ का जोखिम बढ़ सकता है।

https://regionalreporter.in/gangotris-deodar-is-given-raksha-sutra/
https://youtu.be/OS2cl7ChTco?si=WZaXPnZYKhatsscW
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