12 फरवरी को मजदूर एकजुट
केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड लागू करने और श्रम शक्ति नीति–2025 को
वापस लेने की मांग को लेकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 12 फरवरी को राष्ट्रीय हड़ताल का ऐलान किया है।
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU) की हल्द्वानी में
बैठक में सभी संबद्ध यूनियनों ने हड़ताल में पूरी ताकत से भाग लेने का निर्णय लिया।
चार लेबर कोड मजदूर विरोधी: जोगेंद्र लाल
बैठक में ऐक्टू के जिला अध्यक्ष जोगेंद्र लाल ने कहा कि चार लेबर कोड मजदूरों के
संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
उन्होंने बताया कि वेतन संहिता 2019, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता 2020,
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और औद्योगिक संबंध संहिता 2020 “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस”
के नाम पर बड़े उद्योगों और कॉरपोरेट घरानों के हित साधने का माध्यम हैं।
इनसे मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा, संगठन बनाने का अधिकार और सामाजिक सुरक्षा कमजोर होगी।
सम्मानजनक रोजगार पर हमला: डॉ कैलाश पाण्डेय
भाकपा (माले) के नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि मोदी सरकार संविधान द्वारा
प्रदत्त सम्मानजनक और सुरक्षित कार्य स्थितियों के अधिकार पर हमला कर रही है।
उन्होंने बताया कि लेबर कोड्स और श्रम नीति मजदूरों से उनके अधिकार छीनने
और मेहनतकश आबादी को बांटने की नीति को बढ़ावा देती हैं।
बंधुआ मजदूरी जैसे हालात की चेतावनी
वक्ताओं ने कहा कि नए लेबर कोड मजदूरों को बंधुआ मजदूरी जैसे हालात में धकेल सकते हैं
और ठेकाकरण प्रणाली को और बढ़ावा देंगे। उन्होंने इसे मजदूर-विरोधी और प्रतिगामी नीति करार दिया।
बैठक में जोगेंद्र लाल, डॉ कैलाश पाण्डेय, धन सिंह, दीपक कांडपाल, मनोज सिंह आर्य, मुकेश जोशी,
विवेक ठाकुर और अन्य यूनियन प्रतिनिधि शामिल रहे।
हड़ताल में भाग लेने का आह्वान
बैठक के अंत में सभी मजदूरों, कर्मचारियों और मेहनतकश वर्ग से
12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने
और मजदूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का आह्वान किया गया।
















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