रीजनल रिपोर्टर श्रीनगर के तत्वावधान में सर्राफ धर्मशाला, श्रीनगर (गढ़वाल) में “The Fourth Pillar in the
Digital Era: Law, Environment and Public Concern” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया
गया। संगोष्ठी में पत्रकारिता, कानून, पर्यावरण और जनसरोकारों से जुड़े अहम मुद्दों पर सार्थक संवाद हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता इंद्रेश मैखुरी ने किया। उन्होंने कहा कि
डिजिटल दौर में मीडिया की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह लोकतंत्र, पर्यावरण और जनहित की रक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।
अनुभव और संघर्ष से निकली आवाज़ें
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता चारु तिवारी ने उत्तराखंड आंदोलन से लेकर समकालीन सामाजिक संघर्षों
तक के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना और आम जनता की आवाज़ को मजबूती देना है, विशेषकर तब जब पर्यावरण और संसाधनों पर संकट बढ़ रहा हो।
वरिष्ठ पत्रकार हृदेश जोशी ने मुख्यधारा मीडिया के अपने लंबे अनुभवों के आधार पर कहा कि आज के समय में जनसरोकार, खासकर पर्यावरण से जुड़े मुद्दे, लगातार हाशिए पर जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वे अपने चैनल और मंचों के माध्यम से इन विषयों को निरंतर उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
कानून और जनहित का पक्ष
एडवोकेट स्निग्धा तिवारी ने कानून की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जनहित याचिकाओं के माध्यम से किस प्रकार पर्यावरण संरक्षण, नागरिक अधिकारों और शासन की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि जब मीडिया और कानून एक साथ खड़े होते हैं, तब लोकतंत्र अधिक मजबूत होता है।
डिजिटल युग में मीडिया की नई जिम्मेदारी
संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डिजिटल मीडिया के विस्तार के साथ-साथ पत्रकारिता की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं।
फेक न्यूज, पर्यावरणीय संकट, कानूनी अधिकार और जनहित जैसे मुद्दों पर सजग और संवेदनशील पत्रकारिता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में स्थानीय बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
प्रतिभागियों ने इसे समकालीन समय की जरूरत बताते हुए ऐसे विमर्शों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
















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