सरकार व ट्रस्ट से तलब किया जवाब
उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम मंदिर में व्यवस्थाओं और करोड़ों रुपये के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
हाई कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है और राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों व मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है।
ख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार, जिलाधिकारी नैनीताल, एसडीएम कैंची धाम और मंदिर ट्रस्ट से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
याचिका में कहा गया है कि बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा स्थापित कैंची धाम में वर्ष भर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं,
लेकिन मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। न तो ट्रस्ट की वेबसाइट है और न ही आय-व्यय का कोई आधिकारिक विवरण।
नकद चढ़ावे और ऑडिट व्यवस्था पर संदेह
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में चढ़ाया जाने वाला अधिकांश दान नकद रूप में होता है, लेकिन उसके लेखा-जोखा और ऑडिट की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है।
मंदिर की आय-व्यय रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने से करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
स्थानीय प्रशासन भी ट्रस्ट से अनभिज्ञ
याचिका में यह भी कहा गया कि स्थानीय प्रशासन, तहसील कार्यालय, रजिस्ट्रार कार्यालय और जिला प्रशासन के पास भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है
कि कैंची धाम को संचालित करने वाला ट्रस्ट कहां पंजीकृत है और उसका कानूनी ढांचा क्या है।
सरकारी नियंत्रण में लाने की मांग
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से मांग की है कि कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट को बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की तर्ज पर सीमित सरकारी नियंत्रण में लाया जाए,
ताकि मंदिर के संचालन और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
भक्तों की सुविधाओं पर भी सवाल
याचिका में श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी उल्लेख किया गया है।
कहा गया है कि भारी संख्या में आने वाले भक्तों की तुलना में व्यवस्थाएं अपर्याप्त हैं।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
हाई कोर्ट के इस कदम के बाद कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट के संचालन और वित्तीय लेन-देन पर अब न्यायिक निगरानी तय मानी जा रही है।
मामले की अगली सुनवाई में सरकार और ट्रस्ट के जवाब पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
















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