उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या के साथ सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी तेजी से ऊपर जा रहा है।
इन हादसों में सबसे अधिक जोखिम दोपहिया वाहन सवारों, खासकर बच्चों को झेलना पड़ता है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए बालावाला निवासी त्रिलोचन भट्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक अनोखी जागरूकता मुहिम शुरू की है।
मॉर्निंग वॉक से जन-जागरूकता की अनोखी पहल
त्रिलोचन भट्ट प्रतिदिन सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान अपनी पीठ पर एक पोस्टर लगाए नजर आते हैं, जिस पर साफ शब्दों में लिखा होता है- “हेलमेट लगाएं, बच्चों को भी पहनाएं।”
बिना बोले, मूक संदेश के जरिए वे राहगीरों और अभिभावकों को यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि हेलमेट सिर्फ चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन रक्षक कवच है।
भट्ट बताते हैं कि इस मुहिम की शुरुआत उन्होंने तब की, जब उन्होंने एक सड़क हादसे में एक बच्चे को गंभीर रूप से घायल होते देखा।
समाज से मिल रहा समर्थन, बन रहे प्रेरणा स्रोत
उनका कहना है कि अक्सर माता-पिता स्वयं तो हेलमेट पहन लेते हैं, लेकिन साथ बैठे बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
बच्चों के सिर की संरचना नाजुक होती है, ऐसे में उनके लिए हेलमेट और भी जरूरी हो जाता है।
हालांकि देहरादून पुलिस समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाती है, लेकिन अभियान समाप्त होते ही लापरवाही फिर लौट आती है।
ऐसे में भट्ट की यह पहल लोगों को स्थायी रूप से जागरूक करने का प्रयास है। उनकी इस मुहिम को अब लोगों का समर्थन भी मिलने लगा है।
कई अभिभावकों ने बच्चों को हेलमेट पहनाना शुरू किया है, जबकि कुछ दानदाता जरूरतमंद बच्चों के लिए हेलमेट उपलब्ध करा रहे हैं।
बिना किसी सरकारी सहयोग के, त्रिलोचन भट्ट समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनते जा रहे हैं। उनकी यह पहल साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर एक व्यक्ति भी समाज की सोच बदल सकता है।
















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