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ज्योति और हर्षिता की कहानियों ने झकझोरा

लेखन कार्यशाला में उमड़ी सृजन की खुशबू

रीजनल रिपोर्टर ब्यूरो

हल्द्वानी (16 मार्च 2026): सरस मार्केट स्थित ‘रमोलिया हाउस’ में पिछले एक सप्ताह से चल रही सघन लेखन कार्यशाला का सोमवार को गरिमामय समापन हुआ। इस कार्यशाला ने न केवल युवाओं को शब्दों की दुनिया से रूबरू कराया, बल्कि उनकी संवेदनाओं को भी नई धार दी। समापन सत्र में प्रतिभागियों द्वारा पढ़ी गई रचनाओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

लेखन हमें संवेदनशील इंसान बनाता है: डॉ. अनिल कार्की

​कार्यशाला के मुख्य संदर्भदाता और प्रसिद्ध कवि-लेखक डॉ. अनिल कार्की ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वयं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम लेखन ही है। उन्होंने जोर देकर कहा:

​”जो लिखता है, वह समय और परिस्थितियों से निरंतर संवाद करता है। लेखन हमें एक जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन अच्छा लिखने के लिए ‘बेहतर पढ़ना’ पहली शर्त है।”

बचपन को लिखे खतों ने किया भावुक

​कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ‘अपने बचपन को पत्र’ लिखने का अनूठा टास्क दिया गया था। समापन सत्र में जब दिनेश सिंह, आनंद सिंह बसेड़ा, अंकित चौधरी, अजय नेगी, ऐश्वर्या और श्री ने अपने पत्र पढ़े, तो सभागार में पुरानी यादों की धूप और अधूरे सपनों की टीस जीवंत हो उठी।

इन कहानियों ने छोड़ी अमिट छाप

​कहानी लेखन सत्र में ज्योति उपाध्याय चुफाल की आत्मकथात्मक रचना ‘मेरी कहानी’ और हर्षिता रौतेला ‘बुलबुल’ की प्रश्नाकुल कहानी ‘क्या मैं अकेली हूँ?’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन रचनाओं ने मानवीय संवेदनाओं को गहराई से टटोला। इसके अलावा अजय नेगी, धीरज पड़ियार, मुकुल, आशा पांडे और प्रकाश पाण्डे की कहानियों ने भी भीतर तक हलचल पैदा की।

वरिष्ठ रचनाकारों का मिला मार्गदर्शन

  • वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला: उन्होंने कहा कि डॉ. कार्की जैसे सृजनशील व्यक्तित्व से सीखना प्रतिभागियों के लिए खुद को खोजने की एक प्रक्रिया है।
  • रंगकर्मी चारु तिवारी: उन्होंने इस पहल को रचनात्मक चेतना की भूमि तैयार करने वाला प्रयास बताया।
  • हरीश जोशी, घनश्याम भट्ट व हर्षवर्धन वर्मा: इन्होंने युवाओं को मंच और लेखनी दोनों से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।

लोकगायक दीवान सिंह कनवाल को श्रद्धांजलि

​कार्यक्रम के अंत में कुमाऊंनी के सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान सिंह कनवाल के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सभागार ने उनकी सांस्कृतिक सेवाओं को याद करते हुए उन्हें नमन किया

कार्यशाला के आयोजक दिनेश सिंह और अंकित चौधरी ने बताया कि युवाओं के उत्साह को देखते हुए शीघ्र ही दोबारा ऐसी रचनात्मक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा इस सृजन यात्रा का हिस्सा बन सकें।

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