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सरोकारों से साक्षात्कार

गढ़वाल विश्वविद्यालय में संस्कृति का महाकुंभ शुरू

झांकियों ने श्रीनगर बाजार को बनाया उत्तराखंड का जीवंत मंच

भव्य शुरुआत: अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिताओं का आगाज

Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University में अंतर महाविद्यालय सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक प्रतियोगिताओं

का आज भव्य शुभारंभ हुआ।

इस आयोजन में कुल सात महाविद्यालयों के साथ स्वयं विश्वविद्यालय की भागीदारी निर्धारित की गई है।

पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत झांकियों के साथ हुई, जिसने पूरे आयोजन को उत्सव में बदल दिया।

श्रीनगर बाजार बना संस्कृति का रंगमंच

Srinagar के मुख्य बाजार में जब झांकियां निकाली गईं, तो पूरा शहर उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में डूब गया।

सड़कें लोकगीतों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और रंग-बिरंगे परिधानों से सज उठीं।

हर उम्र के लोग इस सांस्कृतिक यात्रा के साक्षी बने।

लोक संस्कृति की जीवंत झलक: परंपरा और आस्था का संगम

झांकियों में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसमें शामिल रहे—

  • जौनसार क्षेत्र के महासू देवता
  • चमोली की प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा
  • पिथौरागढ़ का हिलजात्रा महोत्सव और उसका प्रमुख पात्र लखिया भूत
  • गोरखा समुदाय की सांस्कृतिक झलक
  • लाटू देवता और अन्य स्थानीय देव परंपराएं
  • पांचों पांडव की पौराणिक झलक
  • धारी देवी की आस्था

इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक गहराई से परिचित कराया।

लोकनृत्य और गीतों ने बांधा समां

झांकियों के साथ-साथ पारंपरिक लोकनृत्यों और गीतों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।

चौफुला नृत्य, मांगल गीत और झूमैलो की प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया।

सुंदर पहाड़ी परिधान में सजे छात्रों ने संस्कृति की झलक पेश करते हुए दर्शकों का मन मोह लिया।

नई पीढ़ी ने संभाली संस्कृति की विरासत

इस आयोजन की खास बात यह रही कि युवा छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की।

झांकियों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति आज भी जीवंत है,

और नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

हिलजात्रा महोत्सव का रहस्यमयी पात्र ‘लखियाभूत’

बड़ी कमी: विश्वविद्यालय की झांकी रही गायब

जहां एक ओर सभी महाविद्यालयों की झांकियां आकर्षण का केंद्र बनीं, वहीं स्वयं विश्वविद्यालय की झांकी इस आयोजन में नजर नहीं आई।

इसने आयोजन के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया।

मिस कम्युनिकेशन बनी वजह: प्रो. ध्यानी

कार्यक्रम के आयोजक प्रोफेसर अतुल ध्यानी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि बीते 18 मार्च को हुई अंतर संकाय प्रतियोगिता के देरी से कार्यक्रम देर रात तक (करीब 11 बजे) चलते रहे।

इसके बाद झांकी में प्रतिभाग करने वाले छात्रों की घोषणा की गई, लेकिन सूचना सही समय पर सभी तक नहीं पहुंच पाई।

उन्होंने बताया कि

  • कई छात्र उपलब्ध नहीं थे।
  • उनके परिधान भी उनके पास नहीं थे।
  • समन्वय की कमी (मिस कम्युनिकेशन) के कारण विश्वविद्यालय झांकी में भाग नहीं ले सका।

हालांकि उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होगी।

मां नंदा देवी डोली

आयोजन सफल, आगे के लिए बढ़ा उत्साह

शुरुआती दिन की छोटी कमी के बावजूद, पूरा आयोजन बेहद सफल और सराहनीय रहा।

झांकियों ने जहां उत्तराखंड की संस्कृति को जीवंत किया, वहीं दर्शकों में आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर उत्साह भी बढ़ा दिया है।

जौनसारी पौशाक में महासु देवता की गाथा गाती हुई छात्राएं
https://regionalreporter.in/power-panch-of-dewal/
https://youtu.be/N76_vIMnvJ8?si=D64xPFAfLcH8ZoF8
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