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सरोकारों से साक्षात्कार

श्रीनगर गढ़वाल की वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार

बारिश, बढ़ी नमी और बदले मौसम ने घटाया प्रदूषण का असर

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वातावरणीय

एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला द्वारा जारी “वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तीसरे बुलेटिन”

में श्रीनगर गढ़वाल की वायु गुणवत्ता को लेकर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने आए हैं।

डॉ. आलोक सागर गौतम और उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार एवं सरस्वती रावत

द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया कि हाल के दिनों में हुई बारिश, तापमान में गिरावट और वातावरण

में बढ़ी नमी के कारण क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

खराब से “संतोषजनक” श्रेणी में पहुँचा AQI

शोध रिपोर्ट के अनुसार-

  • 30 अप्रैल 2026 को श्रीनगर गढ़वाल का AQI लगभग 239.52 दर्ज किया गया, जो “खराब” श्रेणी में था।
  • मौसम में बदलाव के बाद AQI लगातार घटता गया।
  • 01 मई: AQI 145
  • 02 मई: AQI 124.41
  • 03 मई: AQI घटकर 80 पहुँचा

इसके बाद 04 से 07 मई के बीच AQI 90–104 के बीच बना रहा, जो “संतोषजनक” से “मध्यम” श्रेणी को दर्शाता है।

जंगलों की आग और बायोमास बर्निंग का असर

अध्ययन में यह भी सामने आया कि हाल के दिनों में हुई वनाग्नि और स्थानीय बायोमास बर्निंग गतिविधियों ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया था।

  • 30 अप्रैल को बायोमास बर्निंग का औसत लगभग 47.84% दर्ज हुआ
  • उसी दिन ब्लैक कार्बन की औसत सांद्रता 640.74 ng/m³ रही
  • 02 मई को ब्लैक कार्बन स्तर बढ़कर 778.36 ng/m³ तक पहुँच गया

हालांकि 03 मई के बाद ब्लैक कार्बन में कमी की प्रवृत्ति दर्ज की गई।

बारिश और नमी बनी राहत की वजह

वैज्ञानिकों के अनुसार—

  • 02 मई को लगभग 9.9 मिमी वर्षा दर्ज हुई
  • 03 से 05 मई तक हल्की बारिश जारी रही
  • वातावरण में नमी बढ़कर कई दिनों में 90% से अधिक तक पहुँच गई

इससे वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कण नीचे बैठ गए, जिसे वैज्ञानिक भाषा में “Washout Effect” कहा जाता है।

मौसमीय बदलाव से कैसे सुधरी हवा?

रिपोर्ट के अनुसार-

  • जब तापमान अधिक और वातावरण शुष्क था, तब AQI और ब्लैक कार्बन दोनों उच्च स्तर पर रहे
  • वहीं बारिश, अधिक नमी और कम तापमान के दौरान प्रदूषण स्तर तेजी से घटा

यह संकेत देता है कि हिमालयी क्षेत्रों में मौसमीय कारक सीधे तौर पर वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

डॉ. गौतम और उनकी टीम का कहना है कि—

  • जंगलों की आग
  • सूखी वनस्पतियों का दहन
  • स्थानीय बायोमास बर्निंग
  • बढ़ता तापमान

भविष्य में फिर से वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वनाग्नि और

स्थानीय प्रदूषण का संयुक्त प्रभाव आने वाले समय में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

जन-जागरूकता और निगरानी पर जोर

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि—

  • वनाग्नि नियंत्रण मजबूत किया जाए
  • वैज्ञानिक निगरानी लगातार जारी रहे
  • स्थानीय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण पर काम होपर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाए
https://youtu.be/SygpkgP062w?si=8Uj2OZop8vuHar4-
https://regionalreporter.in/bageshwar-dham-sarkar-arrives-at-badrinath-dham/
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