रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

HNBGU के मंच पर जीवंत हुआ ‘हयवदन’

कलाकारों के अभिनय ने बांधा समां

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के मंच पर

बुधवार को प्रसिद्ध नाटककार Girish Karnad के चर्चित नाटक ‘हयवदन’ का प्रभावशाली मंचन हुआ।

एम.ए. रंगमंच और डिप्लोमा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इस नाट्य प्रस्तुति ने अपने सशक्त अभिनय

और जीवंत मंचीय प्रस्तुति से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

‘हयवदन’ में माँ काली का सशक्त मंचन

दो घंटे तक सभागार में बना रहा नाट्य का जादू

करीब दो घंटे आठ मिनट तक चले इस नाटक के दौरान सभागार में एक अलग ही रंगमंचीय वातावरण बना रहा।

दर्शक पूरी तल्लीनता से मंच पर घटित हो रही घटनाओं से जुड़े रहे और हर दृश्य के बाद तालियों की गूंज कलाकारों का उत्साह बढ़ाती रही।

पद्मिनी, देवदत्त और कपिल प्रेम, द्वंद्व और अधूरेपन की जटिल कहानी

महेंद्र पंवार के निर्देशन में सधा मंचन

इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन रंगकर्मी डॉ. महेंद्र पंवार ने किया, जो National School of Drama के 2013–16 बैच के स्नातक हैं,

और और वर्तमान में लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में सह-निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

रंगमंच के क्षेत्र में उनका लगभग 18 वर्षों का अनुभव रहा है और वे लगातार नाट्य मंचन से जुड़े रहे हैं।

इससे पहले उन्होंने ‘तुगलक’ जैसे चर्चित नाटक का देहरादून में सफल मंचन भी किया था,

जिसे दर्शकों की खूब सराहना मिली थी।

लंबे रंगमंचीय अनुभव और रंगभाषा की समझ के कारण उनके निर्देशन में तैयार हुई प्रस्तुतियों में मंचीय संतुलन और नाटकीय प्रभाव साफ दिखाई देता है।

कलाकारों ने किरदारों को किया सजीव

कलाकारों की अदायगी ने पूरे नाटक को जीवंत बना दिया।

‘हयवदन’ के माध्यम से मनुष्य के मन और शरीर के बीच चल रहे द्वंद्व तथा अपूर्णता से पूर्णता की तलाश को मंच पर प्रभावी ढंग से उकेरा गया।

देवदत्त देवदत्त और कपिल दोस्ती, द्वंद्व और भावनाओं की गहराई का जीवंत चित्रव कपिल

देवदत्त, कपिल और पद्मिनी का भावनात्मक संसार

नाटक में देवदत्त और कपिल की अगाढ़ मित्रता, उनके बीच का टकराव और पद्मिनी के मनोभावों को कलाकारों ने बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।

इन पात्रों के बीच का भावनात्मक तनाव दर्शकों को पूरी कहानी से जोड़े रखता है।

भागवत की भूमिका ने बनाए रखा प्रवाह

भागवत का पात्र पूरे नाटक में एक सूत्रधार की तरह दिखाई देता है,

जो कहानी को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखता है।

मंच सज्जा और संगीत ने रचा वातावरण

प्रस्तुति की मंच सज्जा और रंग संयोजन ने नाटक के वातावरण को और प्रभावी बनाया।

संगीत संयोजन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. संजय पांडे ने किया,

जबकि तबला और परकशन पर जयेंद्र की संगत ने कई दृश्यों को और सजीव बना दिया।

जब भागवत ने संभाली कहानी, हयवदन ने जोड़ा रहस्य और नट ने भरी ऊर्जा

आधुनिकता का स्पर्श

नाटक में पारंपरिक रंगमंचीय शैली के साथ आधुनिकता का हल्का स्पर्श भी देखने को मिला।

कई दृश्यों में दर्शकों की सहज हंसी और तालियों से यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुति ने उन्हें पूरी तरह जोड़े रखा।

गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर विभाग के निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणी’, प्रोफेसर डी. आर. पुरोहित, सह निदेशक सुभाष पाण्डे, सहित विभाग के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

प्रोफेसर डी. आर. पुरोहित ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावशाली नाट्य अनुभव बताया।

समग्र रूप से ‘हयवदन’ की यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए एक यादगार रंगमंचीय अनुभव साबित हुई।

गुड्डा 1 व गुड्डा 2 की मौजूदगी ने हर दृश्य में घोला अलग ही रंगमंचीय रस
https://regionalreporter.in/uttrakhand-me-gathbandhan-ki-sugbugahat/
https://youtu.be/CMcDrjvoM9k?si=CkS4A6yO4q3Ayvk_
sakshi123@gmail.com
+ posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *