अशोक पांडे और अनिल कार्की संग आत्मीय पलों ने ताज़ा की पुरानी यादें
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अतुल शर्मा की हालिया मुलाकातें साहित्य जगत की आत्मीयता और पुराने रिश्तों की गहराई को दर्शाती हैं।
पुस्तक मेले के दौरान उनकी मुलाकात चर्चित लेखक, अनुवादक और ब्लॉगर अशोक पांडे से हुई, जो एक भावुक और यादगार क्षण बन गई।
अशोक पांडे से मुलाकात: जैसे वर्षों बाद मिले हों साथी
पुस्तक मेले में दोनों साहित्यकारों की मुलाकात इतनी आत्मीय रही मानो बरसों बाद मिल रहे हों।
इस दौरान अशोक पांडे ने अपनी चर्चित पुस्तक लप्पूझन्ना का सातवां संस्करण डॉ. अतुल शर्मा को भेंट किया।
बातचीत के दौरान उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए देहरादून के उन दिनों का जिक्र किया, जब वे नैनीताल युग मंच के साथ नुक्कड़ नाटक करने आए थे।
उन्होंने हंसी-मजाक में “नटखट नंदू” नाम के एक छोटे कुत्ते का भी जिक्र किया, जो उस दौर की यादों का हिस्सा था।

पुराने रंगमंच और साहित्यिक दौर की झलक
इस मुलाकात में रंगमंच और साहित्य के सुनहरे दौर की यादें भी ताजा हुईं।
जगमोहन जोशी (मंटू) और दिनेश अजीत के साथ बिताए गए समय, नुक्कड़ नाटकों और महफिलों का जिक्र हुआ।
अशोक पांडे ने यहां तक कहा कि “वो देहरादून अब शायद कहीं नहीं मिलेगा।”
बातों-बातों में उन्होंने डॉ. अतुल शर्मा के गीतों और मंटू की धुनों को याद करते हुए एक गीत भी दोहराया, जो उस दौर के नाटकों की जान हुआ करता था।
अनिल कार्की से मुलाकात: सम्मान और विनम्रता का उदाहरण
कुछ दिन पहले डॉ. अतुल शर्मा की मुलाकात युवा लेखक और कवि अनिल कार्की से भी हुई,
जिन्हें हाल ही में “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान अनिल कार्की ने मंच से कहा, “जब सामने हमारे गुरु और उस्ताद बैठे हों तो बोलने में संकोच होता है,”—जो उनकी विनम्रता और सम्मान को दर्शाता है।
साहित्यिक विरासत और नई पीढ़ी
डॉ. अतुल शर्मा ने इन मुलाकातों को साहित्यिक विरासत और नई पीढ़ी के बीच सेतु बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे सशक्त, विनम्र और प्रतिभाशाली युवा ही साहित्य का भविष्य हैं।
















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