श्रीनगर में शोक की लहर
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की वरिष्ठ आंदोलनकारी और निर्भीक जननेता विमला कोटियाल के निधन से श्रीनगर गढ़वाल
क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रही विमला कोटियाल ने आज अंतिम सांस ली।
उनके निधन को सामाजिक, राजनीतिक और आंदोलनकारी जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
महिला मंच की सशक्त आवाज रहीं विमला कोटियाल
विमला कोटियाल लंबे समय तक महिला मंच से सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान उन्होंने श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित कर आंदोलन को नई
दिशा देने का कार्य किया। विभिन्न आंदोलनों और प्रदर्शनों में वे अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व करती थीं।
बेबाक नेतृत्व और संघर्षशील व्यक्तित्व की थीं पहचान
अपनी प्रखर वाक्पटुता, स्पष्टवादिता और साहसिक नेतृत्व के कारण विमला कोटियाल की अलग पहचान थी।
आंदोलन के दौर में उन्होंने शासन-प्रशासन के सामने जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया और संघर्षों में सक्रिय भूमिका
निभाई। उनकी आवाज क्षेत्र की महिलाओं और आम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही।
स्थानीय जनसरोकारों की हर लड़ाई में निभाई अहम भूमिका
राज्य आंदोलन के अलावा विमला कोटियाल ने श्रीनगर गढ़वाल के स्थानीय मुद्दों, छात्र आंदोलनों, नागरिक सुविधाओं और जल-
जंगल-जमीन से जुड़े विषयों पर भी लगातार संघर्ष किया। क्षेत्र के अनेक सामाजिक आंदोलनों में उनका मार्गदर्शन और नेतृत्व
महत्वपूर्ण माना जाता था।
निधन पर आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों ने जताया शोक
उनके निधन की सूचना मिलते ही आंदोलनकारियों, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। लोगों ने उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके
योगदान को याद किया।

लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.















Leave a Reply