रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

उत्तराखंड में बदले होम स्टे के नियम, अब 8 कमरे तक मिलेगा पंजीकरण

जानिए नई पॉलिसी की बड़ी बातें

उत्तराखंड सरकार ने होम स्टे योजना में बड़ा बदलाव किया है।

सरकार ने योजना के मूल उद्देश्य से भटकाव और दुरुपयोग की शिकायतों के बाद नई नियमावली लागू की है।

नई पॉलिसी के तहत अब होम स्टे संचालन, पंजीकरण और रिन्यूअल प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया गया है।

राज्य सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और स्थानीय लोगों को अधिक लाभ पहुंचाना है।

उत्तराखंड में कैसे शुरू हुई होम स्टे योजना

उत्तराखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने के उद्देश्य से साल 2015 में होम स्टे योजना शुरू की थी।

इस योजना के जरिए गांवों में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई पहचान मिली।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार में शुरू हुई इस योजना को बाद में त्रिवेंद्र सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी आगे बढ़ाया।

5 हजार से ज्यादा होम स्टे हुए पंजीकृत

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार राज्य में अब तक 5 हजार से ज्यादा होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं।

योजना के तहत करीब 1500 लोगों को सब्सिडी भी दी गई है।

सरकार की ओर से बिजली-पानी के बिल में राहत और रूम रिनोवेशन जैसी सुविधाएं भी दी गईं,

जिससे ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिला।

क्यों करनी पड़ी नई नियमावली लागू

सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि होम स्टे योजना का लाभ बाहरी लोग ज्यादा उठा रहे हैं।

कई जगहों पर नियमों का उल्लंघन भी सामने आया। इसके बाद कई होम स्टे सील किए गए और कार्रवाई की गई।

इसी के चलते सरकार ने टूरिज्म और होम स्टे से जुड़े नियमों में संशोधन करते हुए नई पॉलिसी तैयार की है।

नई होम स्टे पॉलिसी में क्या बदला?

नई नियमावली के तहत होम स्टे में पंजीकरण के लिए कमरों की अधिकतम संख्या 6 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है।

हालांकि कुल बेड की संख्या 24 से अधिक नहीं होगी।

अब पंजीकरण केवल ग्रामीण क्षेत्रों और नगर पंचायत क्षेत्रों में ही किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी ही अपने आवासीय भवन में होम स्टे चला सकेंगे।

भवन स्वामी या उनका परिवार उसी भवन में स्थायी रूप से निवासरत होना जरूरी होगा।

BnB यूनिट को भी मिली मान्यता

नई पॉलिसी में पहली बार BnB यानी बेड एंड ब्रेकफास्ट यूनिट्स को भी पर्यटन इकाई की श्रेणी में शामिल किया गया है।

इन यूनिट्स में भी अधिकतम 8 कमरे और 24 बेड की अनुमति होगी।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया

सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल वेरिफिकेशन और ऑनलाइन रिन्यूअल प्रक्रिया पर जोर दिया है।

अब लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

रिन्यूअल के लिए केवल ऑनलाइन फीस जमा करनी होगी और सेल्फ रिन्यूअल की सुविधा भी दी गई है।

सामुदायिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

नई नियमावली में सामुदायिक आधारित पर्यटन इकाइयों को भी शामिल किया गया है।

इसके तहत 3 से 6 गांवों के समूह में 8 से 10 होम स्टे इकाइयों को जोड़कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार और स्थानीय उत्पादों की बिक्री दोनों को फायदा मिलेगा।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने क्या कहा?

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि साल 2014 की ट्रैवल रजिस्ट्रेशन नियमावली

और 2015 की होम स्टे नियमावली को मिलाकर नई पॉलिसी तैयार की गई है।

उन्होंने कहा कि अब रिन्यूअल प्रक्रिया को भी आसान बना दिया गया है

और लोग आसानी से ऑनलाइन माध्यम से अपना पंजीकरण नवीनीकरण कर सकेंगे।

https://regionalreporter.in/haridwar-tiger-hunting-case-high-alert-dehradun-forest/
https://youtu.be/9Uh5mRbFCJk?si=s9A2C_w4uZogwqS9
Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *