वैज्ञानिकों ने दी स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर गंभीर चेतावनी
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग स्थित
हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला ने
मई 2026 के दौरान श्रीनगर गढ़वाल और आसपास के क्षेत्रों में मौसम, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और ब्लैक कार्बन स्तरों को लेकर चौथा वैज्ञानिक सूचना बुलेटिन जारी किया है।
वैज्ञानिकों ने बढ़ते प्रदूषण, जंगलों की आग और हीट स्ट्रेस को हिमालयी पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया है।
AQI 390 तक पहुंचा, हवा हुई बेहद खतरनाक
शोध टीम के अनुसार 20 मई 2026 की सुबह श्रीनगर क्षेत्र में AQI बढ़कर लगभग 390 तक पहुंच गया।
यह स्तर “Very Poor” से “Severe” श्रेणी के करीब माना जाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस स्थिति में वातावरण में PM2.5, PM10, ब्लैक कार्बन और धुएं जैसे सूक्ष्म प्रदूषक खतरनाक स्तर तक बढ़ जाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 6 मई से 8 मई तक AQI मध्यम श्रेणी में था
लेकिन 9 मई के बाद वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती गई।
19 मई को AQI 356 दर्ज किया गया, जबकि 20 मई को यह और बढ़ गया।
तापमान में 12 डिग्री तक बढ़ोतरी
वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि 7 मई को अधिकतम तापमान 27.19°C था,
जो 19 मई तक बढ़कर लगभग 38.95°C पहुंच गया।
वैज्ञानिकों ने इसे हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते “हीट स्ट्रेस” का संकेत बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी जंगलों में आग,
जल स्रोतों के सूखने और स्थानीय पारिस्थितिकी पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
जंगलों की आग और ब्लैक कार्बन बने बड़ा खतरा
शोध टीम के अनुसार हाल के दिनों में हुई वनाग्नि और बायोमास बर्निंग ने
क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
9 मई को ब्लैक कार्बन का अधिकतम स्तर 8502 ng/m³ तक दर्ज किया गया,
जबकि 19-20 मई को इसका औसत स्तर 1928 ng/m³ पहुंच गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लैक कार्बन सूर्य की गर्मी को अवशोषित कर वातावरण का तापमान बढ़ाता है।
हिमालयी क्षेत्रों में यह हिमनदों के पिघलने की प्रक्रिया को भी तेज कर सकता है।

स्वास्थ्य पर गंभीर असर की चेतावनी
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि खराब वायु गुणवत्ता और बढ़ते ब्लैक कार्बन स्तर से अस्थमा,
एलर्जी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और श्वसन रोगियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में बाहर न निकलने की सलाह दी है।
प्रदूषण अधिक होने पर N95 मास्क का इस्तेमाल करने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने को कहा गया है।
इसके अलावा जंगलों में आग वाले क्षेत्रों से दूरी बनाने और सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
क्या कहा वैज्ञानिकों ने
डॉ. आलोक सागर गौतम और उनकी शोध टीम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जंगलों की आग,
स्थानीय प्रदूषण और बढ़ते तापमान का संयुक्त प्रभाव भविष्य में हिमालयी क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
शोधकर्ताओं ने वनाग्नि नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, कृषि अवशेष प्रबंधन
और मजबूत वायु गुणवत्ता निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया है।
















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