उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले की डागर पट्टी क्षेत्र स्थित पेंडुला ग्राम सभा के पीपली गांव में सोमवार 20 मई को एक
दर्दनाक हादसा सामने आया। 50 वर्षीय अंजू देवी सुबह अपने घर से करीब 500 मीटर दूर जंगल में लकड़ी लेने गई थीं।
इसी दौरान पेड़ से पैर फिसलने के कारण वह नीचे गिर गईं और जंगल में लगी आग की चपेट में आ गईं। आग में झुलसने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मां को खोजने निकला बेटा, जंगल में मिला शव
मृतका के बेटे निवास, जो होटल में काम करने के साथ होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई भी कर रहे हैं, शाम करीब 6 बजे अपनी मां
को खोजने जंगल पहुंचे। काफी तलाश के बाद भी जब अंजू देवी नहीं मिलीं तो उनकी बहन का फोन आया। बहन ने बताया कि
अंजू देवी जिस स्थान “न्यूली” में लकड़ी लेने गई थीं, वहां जाकर खोजबीन की जाए। जब परिवार वहां पहुंचा तो अंजू देवी मृत अवस्था में मिलीं।
40 से 50 प्रतिशत तक जल चुकी थी बॉडी
अंजू देवी के दामाद सूरज ने बताया कि जब परिवार ने उन्हें खोजा तब तक उनका शरीर 40 से 50 प्रतिशत तक जल चुका था।
परिवार उन्हें घर लेकर आया और बाद में घटना की सूचना पुलिस प्रशासन को दी गई। घटना के बाद से परिवार गहरे सदमे में
है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है।

संघर्षों में बीता परिवार का जीवन
सूरज ने बताया कि परिवार का जीवन पहले से ही संघर्षों से भरा रहा है। करीब 16 वर्ष पहले उनकी पत्नी के पिता का निधन हो
गया था, जिसके बाद अंजू देवी ने अकेले ही बच्चों का पालन-पोषण किया।
परिवार का कहना है कि अंजू देवी बेहद मेहनती महिला थीं और घर चलाने के लिए पशु पालन करती थी।
मुआवजे को लेकर वन विभाग पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि वन विभाग ने मुआवजा देने से इनकार कर दिया है।
विभाग का कहना है कि जिस भूमि पर हादसा हुआ वह वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। वहीं सूरज का कहना है
कि आग वन विभाग के जंगलों से ही फैलकर उस क्षेत्र तक पहुंची थी, इसलिए परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए।
गांव में शोक, प्रशासन से मदद की मांग
घटना के बाद पीपली गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और उचित
मुआवजा देने की मांग की है। परिवार का कहना है कि घर की मुखिया के चले जाने से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।















Leave a Reply