1135 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
द्वितीय केदार के नाम से विख्यात श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 21 मई को सुबह 11:30 बजे कर्क लग्न में
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत रूप से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
कपाट खुलने के साथ ही पूरा मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया।
फूलों से सजा मंदिर, गूंजे जयकारे
कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर परिसर में “जय मद्महेश्वर” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
वैदिक विधि-विधान से हुआ कपाट उद्घाटन
मंदिर के कपाट वैदिक परंपराओं और पूजा-अर्चना के साथ खोले गए।
इस दौरान पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधिवत पूजा संपन्न कर कपाट खोलने की प्रक्रिया पूरी कराई।
इसके साथ ही भगवान मद्महेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप में विराजमान किया गया।
डोली यात्रा का पूरा क्रम
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार-
- 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर (उखीमठ) से चल विग्रह डोली रवाना हुई
- राकेश्वरी मंदिर में प्रथम पड़ाव हुआ
- 20 मई को डोली गौंडार गांव पहुंची
- 21 मई को प्रातः डोली मद्महेश्वर धाम पहुंची
इस दौरान रावल भीमाशंकर लिंग और ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने डोली को विधिवत प्रस्थान कराया।
1135 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी के अनुसार कपाट खुलने के दिन लगभग 1135 श्रद्धालु मद्महेश्वर धाम पहुंचे और भगवान के दर्शन किए।
प्रशासन और समिति की तैयारी
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और कहा कि भगवान मद्महेश्वर का आशीर्वाद सभी पर बना रहे।
बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि यात्रा के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह
कपाट खुलने के बाद यात्रा मार्गों पर रौनक लौट आई है।
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में भी खुशी का माहौल है, क्योंकि यात्रा शुरू होने से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।















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