पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
तड़के गिरफ्तारी से भड़का विवाद, प्रदेशभर में विरोध तेज
टीवी पत्रकार हेम भट्ट की गिरफ्तारी को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्मा गया है।
पत्रकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक नेताओं और आम लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इसी बीच पर्वतीय पत्रकार महासंघ ने जिलाधिकारी पौड़ी को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि जिस तरीके से पत्रकार हेम भट्ट को उनके घर से उठाया गया,
वह प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
पूर्व मंत्री अरविंद पांडे ने उठाए सवाल
उत्तराखंड सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे अरविंद पांडे ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकार हेम भट्ट ने हाल ही में उनका इंटरव्यू लिया था, जिसमें कई अहम मुद्दों का खुलासा हुआ था।
संभवतः उसी के बाद यह कार्रवाई की गई।
अरविंद पांडे ने कहा कि सुबह तड़के हेम भट्ट को उनकी पत्नी की मौजूदगी में जिस तरह घर से उठाया गया
और कथित रूप से मारपीट की गई, वह बेहद संदेहास्पद और निंदनीय है।
इंद्रेश मैखुरी ने मुख्यमंत्री और डीजीपी से मांगा जवाब
सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता इंद्रेश मैखुरी ने मुख्यमंत्री, डीजीपी और संबंधित एसपी से जवाब मांगा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या स्थिति थी कि एक वर्दीधारी
और कई बिना वर्दी के लोग अंधेरे में हेम भट्ट के घर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि यदि पूछताछ करनी थी तो कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देकर बुलाया जा सकता था।
बिना पहचान बताए घर में घुसना और कथित रूप से मारपीट करना बेहद गंभीर मामला है।
इंद्रेश मैखुरी ने यह भी पूछा कि बिना वर्दी के मौजूद लोग वास्तव में पुलिसकर्मी थे,
या फिर पुलिस अपने साथ बाहरी लोगों को लेकर गई थी।
यह सवाल हेम भट्ट की पत्नी के आरोपों के बाद और गंभीर हो गया है।
पत्रकार जगमोहन डांगी ने भी उठाए सवाल
ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए
कहा कि पत्रकारों को देर रात या तड़के उठाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस
हेम भट्ट गिरफ्तारी मामले को लेकर सोशल Media पर भी बहस तेज हो गई है।
कई पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रदेशभर में इस मामले को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है।
पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
















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