विधायक अरविंद पांडे ने पुलिस पर उठाए सवाल
उत्तराखंड में पत्रकार हेम भट्ट की कथित गिरफ्तारी को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है।
गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे “उत्पीड़न” बताया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सुबह 4 बजे गिरफ्तारी का आरोप
विधायक के अनुसार, पत्रकार हेम भट्ट को तड़के करीब 4 बजे उनके घर से हिरासत में लिया गया।
आरोप है कि इस दौरान पुलिस कार्रवाई सख्ती के साथ की गई और उनके परिजनों पत्नी व बेटी के सामने उन्हें घर से ले जाया गया।
इस कथित कार्रवाई को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं, हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इंटरव्यू के बाद कार्रवाई पर सवाल
गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने आरोप लगाया है कि पत्रकार हेम भट्ट ने 22 मई को उनका इंटरव्यू लिया था।
विधायक का आरोप है कि इसी इंटरव्यू के बाद पुलिस कार्रवाई की गई,
जिसे वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता पर दबाव के रूप में देख रहे हैं।
विधायक का सख्त रुख
अरविंद पांडे ने अपने बयान में पुलिस प्रशासन से सीधे सवाल किए।
उन्होंने कहा कि पुलिस को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी और शपथ का पालन करना चाहिए, न कि किसी प्रकार के उत्पीड़न में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस कार्रवाई के दौरान पत्रकार या उनके परिवार
को कोई शारीरिक या मानसिक नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।
प्रशासनिक कार्रवाई या उत्पीड़न? विवाद गहराया
यह मामला अब केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहा है,
बल्कि पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया और उसकी वैधता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
एक तरफ इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बताया जा रहा है,
वहीं दूसरी तरफ इसे “अत्यधिक सख्ती” और “दबाव की कार्रवाई” के रूप में देखा जा रहा है।
बड़ा सवाल
यह घटना अब एक व्यापक बहस को जन्म दे रही है कि-
- क्या पत्रकारिता पर सवाल उठाना कार्रवाई का आधार बन सकता है
- क्या पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखा गया
- और क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी प्रकार का दबाव बन रहा है
















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