22 मई 2026 को जंतु विज्ञान विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया।
इस वर्ष की वैश्विक थीम “Acting Locally for Global Impact” को केंद्र में रखते हुए
विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रकृति-आधारित गतिविधियों का आयोजन किया गया,
जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्थानीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
Bird Walk और फील्ड गतिविधियों में विद्यार्थियों की भागीदारी
कार्यक्रम के अंतर्गत विभाग द्वारा Bird Walk और आउटडोर भ्रमण का आयोजन किया गया,
जिसमें लगभग 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने स्थानीय क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों और वन्यजीवों का अवलोकन किया।
विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों की जानकारी भी दी गई, जिसमें eBird और Merlin Bird ID जैसे ऐप शामिल थे।
इन माध्यमों से विद्यार्थियों ने लगभग 55 पक्षी प्रजातियों की एक विस्तृत चेकलिस्ट तैयार की।
जैव विविधता संरक्षण और HWWS इकाई का गठन
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि जैव विविधता संरक्षण की शुरुआत स्थानीय जीव-जंतुओं और पक्षियों की समझ से होती है।
इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा “Himalayan Wild and Winged Society (HWWS)”
की विभागीय इकाई का गठन किया गया।
इस मंच के माध्यम से विद्यार्थियों को पक्षियों एवं वन्यजीवों की पारिस्थितिक भूमिका,
उनके समक्ष खतरों और संरक्षण की आवश्यकता के प्रति जागरूक किया जाएगा।
विशेषज्ञों के विचार और पर्यावरणीय चिंता
विभागाध्यक्ष Prof. Manju Prakash Gusain ने अपने संबोधन में वन्यजीव संरक्षण के महत्व पर
प्रकाश डालते हुए बढ़ती वनाग्नि (Forest Fire) घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा कि जंगल की आग न केवल वनस्पति को नष्ट करती है,
बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों के आवास, भोजन और प्रजनन क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण और वनाग्नि रोकथाम के प्रति समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
Prof. O. P. Gusain ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की पारिस्थितिकी को समझना उसके संरक्षण की पहली आवश्यकता है।
Prof. Deepak Singh Bhandari और Prof. R. S. Fartyal ने विद्यार्थियों को प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी उपयोग और नागरिक विज्ञान पर जोर
कार्यक्रम में Dr. Gunjan Goswami, Dr. Gaurav Bhatt तथा Dr. Anand Kumar ने विद्यार्थियों
को आधुनिक जैव विविधता प्रलेखन, पक्षी पहचान तकनीक, और Citizen Science की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि तकनीक के उपयोग से युवा पीढ़ी वन्यजीव संरक्षण में अधिक प्रभावी योगदान दे सकती है।
कार्यक्रम में जंतु विज्ञान विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों के शोध छात्र एवं विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
सभी ने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।















Leave a Reply