रीजनल रिपोर्टर

सरोकारों से साक्षात्कार

बागेश्वर सड़क हादसे के घायलों को इलाज के लिए भटकना पड़ा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

गनी गांव हादसे के बाद सामने आई स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती

बागेश्वर के गनी गांव में हुए सड़क हादसे में घायल प्रेमनगर निवासी कार्तिक नेगी और उनकी मां सुनीता नेगी को उपचार के

लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद जिला अस्पताल से रेफर किए गए दोनों घायलों को बेहतर इलाज की

उम्मीद में ऋषिकेश ले जाया गया, लेकिन वहां भी उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी।

एम्स में बेड नहीं मिलने से बढ़ी परिजनों की परेशानी

परिजनों के अनुसार, घायलों को एम्स ऋषिकेश ले जाया गया, जहां बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार

कर दिया गया। इस स्थिति ने गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासनिक समन्वय की कमी आई सामने

घटना के दौरान जिला प्रशासन और उच्च स्तरीय अस्पतालों के बीच समुचित तालमेल का अभाव भी देखने को मिला।

बताया जा रहा है कि रेफर किए जाने से पहले संबंधित अस्पतालों को घायलों के पहुंचने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी

गई थी, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

निजी स्तर पर हस्तक्षेप के बाद शुरू हो सका उपचार

आखिरकार घायलों के उपचार की व्यवस्था निजी प्रयासों से संभव हो पाई।

सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप के बाद जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में इलाज शुरू कराया गया, जिससे मरीजों को राहत मिल सकी।

दूसरे राज्यों की व्यवस्था से की जा रही तुलना

इस मामले को लेकर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आपदा और दुर्घटना की स्थिति में अन्य राज्यों में प्रशासनिक प्रतिक्रिया

अधिक सक्रिय दिखाई देती है। उदाहरण के तौर पर दुर्घटनाओं के दौरान त्वरित समन्वय, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति

और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया जा रहा है।

हायर सेंटर रेफरल प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भेजने से पहले संबंधित अस्पताल को सूचित करना आवश्यक है।

इससे मरीज के पहुंचने से पहले ही बेड, डॉक्टर और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की तैयारी सुनिश्चित की जा सकती है।

सरकारी सहायता और संवेदनशीलता बढ़ाने की मांग

दुर्घटना के मामलों में राज्य सरकार की ओर से त्वरित सहायता, उपचार खर्च में सहयोग और प्रशासनिक निगरानी की

आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे प्रभावित परिवारों को कठिन परिस्थितियों में अतिरिक्त राहत मिल सकती है।

ट्रॉमा और न्यूरो सुविधाओं के विस्तार पर जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में ट्रॉमा और न्यूरो चिकित्सा सुविधाओं को और मजबूत करने

की जरूरत है। इससे गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेने की मजबूरी कम होगी और समय पर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।

घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर खड़े किए सवाल

यह पूरा मामला राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशासनिक समन्वय और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन को लेकर कई सवाल छोड़

गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में

कदम उठाए जाने चाहिए।

Tags:

https://regionalreporter.in/devbhoomi-family-id-scheme-to-be-implemented-in-uttarakhand/
https://youtu.be/xi720jCgQyA?si=M4cO1FFrt1KZ634C
Website |  + posts

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *