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रुद्रप्रयाग के दिनेश ने ट्राउट मत्स्य पालन से बदली तकदीर

सालाना 5 लाख तक की कर रहे कमाई, शहर छोड़ गांव लौटे, अब बन गए सफल उद्यमी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संचालित स्वरोजगार योजनाएं उत्तराखंड के युवाओं के लिए नई उम्मीद बन रही हैं।

इन्हीं योजनाओं का लाभ उठाकर रुद्रप्रयाग जिले के लदोली गांव निवासी दिनेश सिंह चौधरी ने शहर की नौकरी छोड़ गांव में ट्राउट मत्स्य पालन शुरू किया

और आज हर साल 4 से 5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

2021 में लिया गांव लौटने का फैसला

दिनेश सिंह चौधरी ने वर्ष 2021 में शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौटने का निर्णय लिया।

उन्होंने स्वरोजगार के लिए ट्राउट मत्स्य पालन को चुना और आज सफलतापूर्वक ट्राउट मछली का उत्पादन करने के साथ-साथ अपनी हैचरी में ट्राउट की ब्रीडिंग भी कर रहे हैं।

सरकारी योजना से मिली आर्थिक मदद

मत्स्य पालन इकाई स्थापित करने में दिनेश सिंह चौधरी ने 60 प्रतिशत निवेश स्वयं किया,

जबकि 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता मत्स्य विभाग ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई।

विभागीय सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने अपने उद्यम को सफल बनाया।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का मिला लाभ

जिला प्रभारी मत्स्य विभाग मंजू भाकुनी ने बताया कि दिनेश सिंह चौधरी को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत विभागीय सहायता प्रदान की गई थी।

योजना का लाभ मिलने के बाद उन्होंने ट्राउट मत्स्य पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया और आज अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग समय-समय पर किसानों और युवाओं को योजनाओं की जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन

और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है, ताकि अधिक से अधिक लोग मत्स्य पालन से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

हर साल 4 से 5 लाख रुपये की आय

वर्तमान में दिनेश सिंह चौधरी ट्राउट मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

उनकी सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और मेहनत के दम पर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

दिनेश सिंह चौधरी की सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

उनका सफर यह संदेश देता है कि स्वरोजगार अपनाकर न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना जा सकता है,

बल्कि गांव में रहकर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

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