सीमांत जिले पिथौरागढ़ के बलुवाकोट क्षेत्र के लेक गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई,
जब जंगल से निकलकर एक विशाल मॉनिटर लिजर्ड यानी गोह गांव में पहुंच गया।
गोह का सिर एक डिब्बे में फंस गया था, जिसके कारण वह काफी देर तक तड़पता रहा।
वन्यजीव को परेशानी में देख गांव की प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका और कुशल पर्वतारोही जावंती पांडेय (जया) ने
स्थानीय युवक भाष्कर के साथ मिलकर उसका रेस्क्यू करने का फैसला किया।
सावधानी से डिब्बा हटाकर बचाई गोह की जान
जावंती पांडेय और भाष्कर ने काफी सावधानी बरतते हुए गोह के सिर में फंसे डिब्बे को अलग किया।
रेस्क्यू के दौरान दोनों ने वन्यजीव को नुकसान पहुंचाए बिना उसे सुरक्षित करने की कोशिश की
और आखिरकार उसके सिर से डिब्बा निकालने में सफल रहे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक गोह को क्षेत्र में ‘ग्वाण’ नाम से भी जाना जाता है
और इसे खतरनाक वन्यजीव माना जाता है। ऐसे में उसके सिर से डिब्बा निकालना जोखिम भरा काम था।
30 साल से शिक्षण के साथ साहसिक गतिविधियों से जुड़ी हैं जया
जावंती पांडेय पिछले तीन दशक से अधिक समय से अध्यापन के साथ साहसिक खेलों को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं।
वह युवाओं को साहसिक गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित भी करती हैं।
वह इंट्रिसिक क्लाइंबर्स एंड एक्सप्लोरर्स (ICE) की संस्थापक हैं और अब तक सैकड़ों युवक-युवतियों को साहसिक खेलों का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
बिरथी जलप्रपात से उतरकर बनाया था रिकॉर्ड
जया पांडेय इससे पहले भी अपने साहसिक कारनामों के लिए पहचान बना चुकी हैं।
कोविड महामारी के पहले चरण के दौरान 6 दिसंबर 2020 को उन्होंने करीब 148 मीटर ऊंचे बिरथी जलप्रपात से उतरकर एक कीर्तिमान बनाया था।
इस उपलब्धि के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया।
वन्यजीव के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल
गांव में पहुंचे गोह के रेस्क्यू के दौरान जया पांडेय ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसकी मदद करने का फैसला लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वन्यजीव को खतरनाक माना जाता है, इसके बावजूद जया ने धैर्य और सावधानी के साथ रेस्क्यू पूरा किया।
वन्यजीव के प्रति संवेदनशीलता और साहस की यह घटना अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है
और लोगों के लिए मानवता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रही है।














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