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अंकिता भंडारी केस: पुलकित आर्य समेत 3 की जमानत पर 18 अगस्त को सुनवाई

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर हाईकोर्ट में सुनवाई का दौर शुरू हो गया है।

मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाओं

पर अब 18 अगस्त 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

सोमवार को न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के सामने तीनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

बचाव पक्ष ने अदालत के सामने आरोपियों को निर्दोष बताते हुए कई दलीलें रखीं।

अब अगली सुनवाई में अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष अपना पक्ष रखेंगे।

बचाव पक्ष ने WhatsApp चैट और सबूतों पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान तीनों अभियुक्तों की ओर से कहा गया कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने उन WhatsApp संदेशों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए, जिनका इस्तेमाल अभियोजन की कहानी में अहम साक्ष्य के तौर पर किया गया है।

बचाव पक्ष की ओर से इन संदेशों को सत्यापित नहीं होने और साजिश के तहत तैयार किए जाने की दलील दी गई।

अदालत के सामने अन्य तथ्यों को भी रखते हुए आरोपियों की ओर से अपने बचाव में बहस की गई।

अब 18 अगस्त को अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष इन दलीलों का जवाब देंगे।

पहले भी हाईकोर्ट से नहीं मिली थी अंतरिम राहत

यह पहली बार नहीं है जब दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में राहत मांगी गई हो।

इससे पहले जून 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पुलकित आर्य और सौरभ भास्कर को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

उस दौरान बचाव पक्ष ने अंकिता की मौत को आत्महत्या बताते हुए मामले में प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं होने की दलील दी थी।

वहीं, अभियोजन और पीड़ित पक्ष की ओर से घटनास्थल से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों, CCTV/DVR और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्यों का हवाला दिया गया था।

इसके बाद मामले की आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की गई थी।

30 मई 2025 को तीनों को हुई थी उम्रकैद

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया था।

अदालत ने तीनों को हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े आरोपों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

पुलकित आर्य को IPC की धारा 302, 201 और 354A के तहत दोषी ठहराया गया था, जबकि सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को धारा 302 और 201 के तहत दोषी पाया गया।

फैसले के बाद तीनों दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

इसी अपील के साथ सजा के दौरान जमानत और सजा निलंबित करने की मांग भी की गई है।

2022 में सामने आया था पूरा मामला

अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं।

18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थीं।

जांच के दौरान पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।

करीब छह दिन बाद 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद किया गया था।

अभियोजन के अनुसार, अंकिता की हत्या कर शव को नहर में फेंका गया था।

SIT जांच के बाद दाखिल हुई थी चार्जशीट

मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था। जांच के बाद अभियोजन ने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की।

मुकदमे की पहली सुनवाई 30 जनवरी 2023 को हुई थी। इसके बाद आरोप तय किए गए और 28 मार्च 2023 से अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही शुरू हुई।

ट्रायल के दौरान 47 गवाहों, जिनमें जांच अधिकारी भी शामिल थे, के बयान दर्ज किए गए।

दो साल से ज्यादा चला ट्रायल

मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की लंबी बहस के बाद मई 2025 में ट्रायल पूरा हुआ।

19 मई को अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने 30 मई को फैसला सुनाया और तीनों को उम्रकैद की सजा दी।

अब मामला निचली अदालत से निकलकर हाईकोर्ट में अपील के चरण में है।

इसलिए 18 अगस्त की सुनवाई यह तय करने में अहम होगी कि तीनों दोषियों को अपील लंबित रहने के दौरान जमानत या कोई अन्य राहत मिलती है या नहीं।

18 अगस्त पर सबकी नजर

अंकिता भंडारी हत्याकांड को करीब चार साल होने जा रहे हैं, लेकिन मामला अभी पूरी तरह कानूनी तौर पर खत्म नहीं हुआ है।

निचली अदालत से तीनों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है और अब हाईकोर्ट में उनकी अपील और जमानत याचिकाओं पर सुनवाई जारी है।

18 अगस्त को होने वाली सुनवाई में अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलें सामने आने के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।

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