इंडिया गेट से पुलिस मुख्याय तक मार्च; जानिए कैसे बना ये आंदोलन
NEET-UG 2026 पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP फिर दिल्ली की सड़कों पर उतरने वाली है।
CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने 24 अगस्त को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मार्च की घोषणा की है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि 25 जुलाई को केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन अबतक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं।
CJP का कहना है कि इन्हीं वादों के आधार पर 25 जुलाई को छात्रों का आंदोलन अस्थायी रूप से रोका गया था।
इस बार किसके नेतृत्व में होगा मार्च?
CJP के मुताबिक मार्च में NEET से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों की प्रमुख भूमिका होगी।
इसके अलावा 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई से प्रभावित हुए प्रदर्शनकारियों को भी मार्च में शामिल किया जाएगा।
CJP ने सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया है और आंदोलन दोबारा तेज करने के संकेत दिए हैं।
आखिर CJP है क्या
नाम में ‘पार्टी’ होने के बावजूद CJP फिलहाल कोई पंजीकृत चुनावी राजनीतिक दल नहीं है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक CJP खुद को युवाओं का दबाव समूह और सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन बताती है। (
इस संगठन की शुरुआत 16 मई 2026 को हुई थी और इसके केंद्र में छात्रों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दे रहे हैं।
शुरुआत में CJP का अभियान सोशल मीडिया और व्यंग्यात्मक राजनीतिक कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंचा।
इसके बाद NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों ने इसे सड़क पर उतरने वाला आंदोलन बना दिया।
NEET विवाद से कैसे जुड़ी CJP
NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ CJP ने दिल्ली में बड़ा आंदोलन शुरू किया।
जून में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में छात्रों, अभिभावकों और युवा पेशेवरों की बड़ी संख्या शामिल हुई थी।
CJP ने तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया।
जून में आंदोलन दिल्ली से आगे बढ़ा और पुणे तथा लखनऊ समेत कई जगहों पर CJP समर्थकों ने प्रदर्शन किए।
हालांकि लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों के कुछ लोगों ने CJP के राजनीतिक जुड़ाव पर आपत्ति भी जताई थी।
उनका कहना था कि परीक्षा संबंधी आंदोलन छात्रों का है,
और किसी राजनीतिक संगठन को मंच पर हावी नहीं होना चाहिए।
सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े
दिल्ली के आंदोलन के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी CJP समर्थित प्रदर्शन से जुड़े और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की।
जुलाई में आंदोलन इतना बड़ा हुआ कि केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच बातचीत शुरू करनी पड़ी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से बातचीत की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच कई मांगों पर सहमति नहीं बनी।
CJP ने बातचीत को अपर्याप्त बताते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रखी।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
20 जुलाई में CJP ने ‘संसद चलो’ अभियान भी चलाया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली में जुटे थे।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आंदोलन के दौरान कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए और कुछ लोग घायल भी हुए।
CJP ने उस दौरान पुलिस कार्रवाई और आंदोलन में कथित बाहरी हस्तक्षेप को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।
दूसरी ओर, प्रशासन और सरकार की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया था।
25 जुलाई को क्यों रुका था आंदोलन
लगातार कई हफ्तों के विरोध के बाद 25 जुलाई को CJP ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन रोकने का फैसला किया।
संगठन का कहना था कि सरकार की ओर से कुछ मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।
लेकिन अब CJP का आरोप है कि सरकार ने उस समय किए गए वादों को अपेक्षित तरीके से लागू नहीं किया।
इसी वजह से संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में नया विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है।

CJP का आंदोलन अब कितना बड़ा
CJP का अभियान अब सिर्फ NEET तक सीमित नहीं दिख रहा है और परीक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के मुद्दे इसके केंद्र में हैं।
जून में लखनऊ में पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा परिणामों से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी CJP सक्रिय रही।
तमिलनाडु में भी CJP से जुड़े छात्र विरोधों को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया था।
19 अगस्त को तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला आदेश वापस ले लिया।
राजस्थान में CJP की ओर से सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर निरीक्षण अभियान चलाने की बात भी सामने आई।
इसी अभियान को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास और उद्योगपति मोहनदास पई के बीच सार्वजनिक बहस भी हुई।
अब आगे क्या
5 सितंबर का मार्च यह तय करेगा कि जुलाई के बाद CJP का आंदोलन दोबारा कितनी ताकत के साथ सामने आता है।
फिलहाल संगठन ने इसे शांतिपूर्ण मार्च बताया है और NEET पीड़ित परिवारों को आंदोलन के केंद्र में रखने की बात कही है।
सरकार की ओर से इन आरोपों और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर अंतिम प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
यानी CJP की कहानी सोशल मीडिया के व्यंग्यात्मक अभियान से शुरू होकर अब देशव्यापी छात्र और परीक्षा सुधार आंदोलन तक पहुंच चुकी है।
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