स्वास्थ्य मंत्री के सामने पहुंचा मामला; जांच के आदेश
परिजनों ने बेटे की जगह बेटी सौंपने का लगाया आरोप, डीएनए टेस्ट और CCTV जांच की मांग
दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है।
शनिवार, 29 अगस्त को एक परिवार ने अस्पताल कर्मचारियों पर नवजात बदलने का आरोप लगाया।
परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के सामने पूरा मामला रखा।
उन्होंने नवजात का डीएनए टेस्ट कराने और CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने कहा कि जांच के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला गलतफहमी का है या फिर कोई गड़बड़ी हुई है।
परिवार का आरोप- बेटे की जगह सौंप दी बेटी
पीड़ित सुमित कुमार के अनुसार, उनकी पत्नी की गर्भावस्था के दौरान दून अस्पताल में इलाज चल रहा था।
प्रसव का समय नजदीक आने पर डॉक्टरों ने उनकी पत्नी को 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती किया था।
सुमित का दावा है कि 24 अगस्त को डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव संभव नहीं होने की बात कही।
इसके बाद परिजनों की सहमति से उनकी पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी की गई।
ऑपरेशन के बाद नवजात को देखने नहीं दिया
सुमित के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान परिजनों ने नवजात को देखने की मांग की थी।
उनका आरोप है कि उन्हें ऑपरेशन थिएटर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
सुमित का कहना है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें एक दस्तावेज दिया गया, जिसमें नवजात का जेंडर मेल यानी लड़का दर्ज था।
लेकिन जब उन्हें नवजात सौंपा गया तो वह लड़की थी।
इसके बाद परिवार ने अस्पताल प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग शुरू कर दी।
CCTV फुटेज दिखाने की भी मांग
परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अस्पताल की CCTV फुटेज दिखाने की मांग की।
परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत के बावजूद मामले में तत्काल जांच नहीं की गई।
इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के सामने अपनी शिकायत रखी और डीएनए जांच कराने की मांग की।
परिवार का कहना है कि डीएनए जांच से नवजात की पहचान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल शनिवार को दून अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।
इसी दौरान परिवार ने उनके सामने नवजात बदलने का आरोप लगाते हुए शिकायत रखी।
मंत्री ने मौके पर ही चिकित्सा शिक्षा निदेशक को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मामले में फिलहाल भ्रम की स्थिति है, लेकिन इसे दूर करना जरूरी है।
मंत्री के अनुसार, जांच के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला केवल गलतफहमी है या वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है।
जरूरत पड़ी तो कराया जाएगा DNA टेस्ट
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कई बार गलतफहमियां गंभीर माहौल पैदा कर देती हैं।
ऐसी स्थिति में अस्पताल की छवि भी प्रभावित होती है।
इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अस्पताल प्रशासन की जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक की जांच के बाद यह पता चलेगा कि नवजात की पहचान को लेकर कोई गलती हुई है या परिवार की आशंका गलत है।
डीएनए जांच कराए जाने की स्थिति में उससे भी मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।















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