समाजसेवी एवं ज्योतिषाचार्य आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल ने मरणोपरांत नेत्रदान करने का संकल्प लिया है।
उन्होंने मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में नेत्रदान का शपथपत्र भरकर यह पहल की।
जरूरतमंदों की मदद के लिए दान करेंगे आंखें
आचार्य भास्करानंद ने कहा कि उनके निधन के बाद उनकी आंखें किसी जरूरतमंद नेत्रहीन व्यक्ति के कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयोग की जाएं।
उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए नेत्रदान की संभावना को भी अपनी इच्छा में शामिल किया है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे किसी व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का अवसर मिल सकता है।
लोगों से भी नेत्रदान की अपील
आचार्य भास्करानंद ने लोगों से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
नेत्रदान शपथपत्र में आचार्य अणथ्वाल की उम्र 75 वर्ष दर्ज है।
उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत के सहयोग से उन्होंने यह शपथपत्र भरा है।
उन्होंने कहा कि मरणोपरांत आंखों का उपयोग मानव सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में हो, इसी उद्देश्य से उन्होंने नेत्रदान का संकल्प लिया है।















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