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सरोकारों से साक्षात्कार

30 से ज्यादा अफसर, सिर्फ 34 शिकायतें

गैरसैंण के तहसील दिवस में क्यों नहीं पहुंचे फरियादी

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित तहसील दिवस में

अधिकारियों की भारी मौजूदगी के बावजूद जनता की भागीदारी बेहद कम रही।

30 से अधिक विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में केवल 34 शिकायतें दर्ज होने से आयोजन की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

गैरसैंण विकासखंड कार्यालय के सभागार में मंगलवार, 1 सितंबर को उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग/गैरसैंण

अलकेश नोडियाल की अध्यक्षता में तहसील दिवस आयोजित किया गया।

इस दौरान विभिन्न विभागों के 30 से अधिक अधिकारी मौजूद रहे।

हालांकि, अधिकारियों की संख्या के मुकाबले फरियादियों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी।

तहसील दिवस में कुल 34 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से तीन से चार शिकायतें एक ही जनप्रतिनिधि की ओर से दर्ज कराई गईं।

30 से ज्यादा अफसर पहुंचे, जनता की भागीदारी रही कम

तहसील दिवस में पहुंचे जनप्रतिनिधियों ने कम संख्या में लोगों के पहुंचने का कारण सूचना का अभाव बताया।

उनका कहना है कि तहसील दिवस के आयोजन की जानकारी समय पर आम जनता और जनप्रतिनिधियों तक नहीं पहुंच सकी।

जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि तहसील दिवस का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता तो अधिक से अधिक लोग अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रख सकते थे।

उन्होंने तहसील प्रशासन से भविष्य में ऐसे आयोजनों की जानकारी समय पर देने और व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने की मांग की।

केवल 7 से 8 जनप्रतिनिधि ही पहुंचे

क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र आर्या ने बताया कि तहसील दिवस में केवल 7 से 8 जनप्रतिनिधि ही पहुंच पाए।

उन्होंने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों तक समय पर सूचना नहीं पहुंचने के कारण लोगों की भागीदारी कम रही।

वीरेंद्र आर्या ने कहा कि तहसील दिवस में जनता और जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने का सबसे बड़ा कारण सूचना व्यवस्था की कमी है।

समय पर जानकारी नहीं मिलने से लोग ऐसे आयोजनों का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विभिन्न शिविरों और बैठकों का आयोजन होता है, जहां स्थानीय समस्याएं उठाई जाती हैं। लेकिन कई बार शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो पाता है।

उनका कहना था कि यदि तहसील प्रशासन समय रहते प्रचार-प्रसार और सूचना उपलब्ध कराता तो निश्चित रूप से अधिक लोग तहसील दिवस में पहुंचते।

नगर पंचायत अध्यक्ष बोले- मुझे भी नहीं दी गई सूचना

नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने भी तहसील दिवस की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि नगर के प्रथम नागरिक होने के बावजूद उन्हें भी आयोजन की जानकारी नहीं दी गई।

मोहन भंडारी ने कहा कि उन्हें गैरसैंण में आयोजित तहसील दिवस की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता की शिकायतों के समाधान के लिए इतना महत्वपूर्ण आयोजन किया जाता है, तो संबंधित जनप्रतिनिधियों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी जाती।

उन्होंने कहा कि तहसील दिवस जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित किए जाने चाहिए, न कि केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए।

समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों में बढ़ती है निराशा

मोहन भंडारी ने कहा कि पहले भी क्षेत्र में बहुउद्देश्यीय शिविर और तहसील दिवस आयोजित किए जाते रहे हैं।

इन आयोजनों में दूरदराज के गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।

लेकिन शिकायतों का समाधान नहीं होने पर ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार और अधिकारियों को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

उनका कहना है कि शिकायतों के समयबद्ध समाधान से ही जनता का प्रशासन और सरकार पर भरोसा मजबूत हो सकता है।

एसडीएम ने दिए शिकायतों के जल्द निस्तारण के निर्देश

तहसील दिवस के दौरान उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग/गैरसैंण अलकेश नोडियाल ने दर्ज शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि भविष्य में तहसील दिवस और अन्य जनसुनवाई कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

साथ ही, जनप्रतिनिधियों और आम जनता को समय पर सूचना उपलब्ध कराई जाए।

अब सवाल यह है कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित होने वाले तहसील दिवस में जब 30 से ज्यादा अधिकारी मौजूद हों और शिकायतें केवल 34 दर्ज हों, तो क्या ऐसे आयोजनों का उद्देश्य वास्तव में पूरा हो पा रहा है?

https://regionalreporter.in/gairsain-permanent-capital-padyatra-uttarakhand/
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