अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी में आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है।
पार्टी से जुड़े रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने अलग गुट बनाने का ऐलान किया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक यानी CJP-D नाम से नया संगठन शुरू किया है।
उन्होंने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट
मनीष ब्रह्मभट्ट को सीजेपी के पूर्व स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर बताया जा रहा है।
वह सीजेपी से जुड़े आंदोलन और गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, ब्रह्मभट्ट ने संगठन की शुरुआती गतिविधियों में हिस्सा लिया था।
अब उन्होंने मूल संगठन के नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अलग मंच बनाया है।
सीजेपी नेतृत्व पर क्या आरोप लगाए?
मनीष ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि आंदोलन की सफलता के बाद सीजेपी की 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम बनाई गई।
इसमें जमीनी कार्यकर्ताओं, छात्रों और सोशल मीडिया स्वयंसेवकों से पर्याप्त सलाह नहीं ली गई।
उन्होंने दावा किया कि नई टीम में आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोग शामिल हैं।
ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि सीजेपी अब युवाओं के आंदोलन के बजाय राजनीतिक हितों की दिशा में बढ़ रही है।
हालांकि, ये सभी आरोप मनीष ब्रह्मभट्ट की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सीजेपी-डेमोक्रेटिक का एजेंडा क्या होगा?
मनीष ब्रह्मभट्ट ने नए गुट के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया को प्रमुख आधार बताया है।
उनका कहना है कि नए संगठन में छात्रों, युवाओं, प्रदर्शनकारियों और जमीनी स्वयंसेवकों को अधिक भागीदारी दी जाएगी।
सीजेपी-डेमोक्रेटिक का गठन मूल संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष के बाद हुआ है। इससे सीजेपी के सामने संगठनात्मक चुनौती खड़ी हो गई है।
अभिजीत दीपके ने आरोपों पर क्या कहा
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने संगठन को कांग्रेस या आम आदमी पार्टी की बी टीम बताए जाने के आरोपों को खारिज किया है।
दीपके ने कहा कि सीजेपी का मुख्य फोकस छात्रों, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर है। उन्होंने संगठन को किसी राजनीतिक दल का हिस्सा मानने से इनकार किया।
सीजेपी की शुरुआत कैसे हुई
कॉकरोच जनता पार्टी की पहचान छात्र आंदोलनों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले मंच के रूप में बनी।
नीट परीक्षा और सरकारी स्कूलों की समस्याओं को लेकर सीजेपी की गतिविधियां चर्चा में आईं।
इसके बाद संगठन ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों जैसे मुद्दों को उठाया।
अब संगठन के भीतर फूट सामने आने से इसकी आगे की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या सीजेपी पूरी तरह टूट गई
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सीजेपी पूरी तरह टूट गई है।
इतना जरूर है कि मनीष ब्रह्मभट्ट ने अलग संगठन बनाकर अभिजीत दीपके के नेतृत्व को चुनौती दी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीजेपी के कितने कार्यकर्ता और स्वयंसेवक नए गुट के साथ जाते हैं।
वहीं, अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली सीजेपी इस विवाद का किस तरह जवाब देती है, इस पर भी नजर रहेगी।

















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