अधिकारियों ने बताया हालात सामान्य, रिपोर्ट में पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया; हाईकोर्ट ने पूरे नैनीताल में वाटर टेस्टिंग के दिए निर्देश
ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से बीमारी फैलने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया।
सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत
और जल संस्थान के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए।
प्रशासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है।
अधिकारियों ने स्थानीय जल स्रोतों के सैंपल सामान्य पाए जाने की जानकारी भी दी।
हालांकि, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
बोर्ड की ओर से पेश रिपोर्ट में 10 स्थानों से लिए गए सभी सैंपल जांच में फेल पाए गए।
10 जगहों के सभी सैंपल फेल
रिपोर्ट के मुताबिक वीरभट्टी, बेलुवाखान, प्रेमा जगाती स्कूल और सरिताताल समेत 10 स्थानों से पानी के नमूने लिए गए थे।
इन सभी नमूनों की इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब में जांच कराई गई।
जांच में सभी सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे और पानी में बैक्टीरिया पाए गए।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी स्थिति चिंताजनक मिली। विभाग की ओर से जांचे गए पांच नमूनों में चार फेल पाए गए।
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई।
एक महीने पहले शिकायत, फिर भी कार्रवाई में देरी
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अधिकारियों से जवाब मांगा।
कोर्ट ने कहा कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर अधिकारियों की संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है।
अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि ग्रामीण करीब एक महीने पहले बदबूदार पानी की शिकायत कर चुके थे।
इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
खुर्पाताल के लोगों ने भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों की ओर से भी एक प्रार्थना पत्र अदालत में पेश किया गया।
इसमें सरिताताल के आसपास सीवर लाइन चोक होने की शिकायत की गई है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि सीवर की गंदगी पेयजल स्रोतों और पानी की लाइनों में मिल रही है।
इससे आसपास के इलाकों में भी जलजनित बीमारी फैलने का खतरा बताया गया। कोर्ट ने इस प्रार्थना पत्र को रिकॉर्ड में ले लिया।
मुख्य सचिव करेंगे मामले की निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को पूरे मामले की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव को अगले सप्ताह तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया है।
सीएमओ को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कोर्ट को जलजनित बीमारी रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
अब पूरे नैनीताल में होगी पानी की जांच
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन की जांच समिति में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शामिल किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तुरंत नए पानी के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही प्रशासन को पूरे नैनीताल क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता की जांच कराने को कहा गया है।
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
इससे पहले 8 सितंबर को हाईकोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति और जल स्रोतों की तत्काल जांच के निर्देश दिए थे।
ज्योलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पानी से फैली बीमारी के मामले में अब अदालत की निगरानी में जांच और राहत कार्य आगे बढ़ेंगे।















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