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सरोकारों से साक्षात्कार

कर्णप्रयाग में सिंद्रवाणी-सकण्ड सड़क को मिली मंजूरी

चमोली जिले के कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के सकंड गांव के ग्रामीण लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं।

मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने खुद गैंती-फावड़ा उठाकर सड़क काटने का काम शुरू कर दिया था।

अब सिंद्रवाणी से सकण्ड तक 9.50 किलोमीटर मोटर मार्ग के नव निर्माण के प्रथम चरण को शासन से प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिल गई है।

लोक निर्माण विभाग ने सर्वेक्षण और आवश्यक कार्यवाही के लिए 15.68 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।

सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने खुद शुरू किया काम

ग्रामीणों का कहना था कि शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार सड़क की मांग के बावजूद गांव तक सड़क नहीं पहुंची।

इसके बाद ग्रामीणों ने अपने निजी संसाधनों और श्रमदान से सड़क निर्माण शुरू किया।

ग्रामीण गैंती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजार लेकर सड़क काटने में जुट गए थे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि विधायक अनिल नौटियाल ने तीन महीने के भीतर सर्वे कराने और सड़क कटिंग शुरू कराने का आश्वासन दिया था।

समय बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं होने पर ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क से नहीं जोड़ने पर 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।

विधायक बोले- तकनीकी अड़चनों के कारण अटका था काम

कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल के अनुसार, सड़क निर्माण को लेकर कई बार सर्वे कराया गया था।

विभागीय और अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

उनके मुताबिक ग्रामीणों की आम सहमति के बाद दोबारा सर्वे कराया गया। अब सड़क के प्रथम चरण के लिए वित्तीय स्वीकृति मिल गई है।

ग्राम प्रधान बोलीं- धरातल पर काम शुरू होने तक भरोसा नहीं

ग्राम प्रधान खरसांई (सकंड) शिवानी चौधरी ने कहा कि इससे पहले भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान

इसी तरह की स्वीकृति की बात सामने आई थी, लेकिन धरातल पर काम नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि जब तक जेसीबी से सड़क कटिंग का काम शुरू नहीं होता, तब तक ग्रामीण इस स्वीकृति पर विश्वास नहीं करेंगे।

उनके अनुसार, फिलहाल स्वीकृति को लेकर ग्रामीणों में खास उत्साह नहीं है।

सर्वे शुरू, ग्रामीणों को अब काम का इंतजार

सकंड गांव के सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र बिष्ट ने बताया कि मंगलवार से लोक निर्माण विभाग ने सर्वे का काम शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि गैंती-फावड़ा आंदोलन के बाद प्रथम चरण की वित्तीय स्वीकृति मिली है।

हालांकि, उनका कहना है कि ग्रामीण अभी भी आश्वासन और स्वीकृति से ज्यादा धरातल पर सड़क कटिंग का काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।

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