2013 से जारी है पुराण वाचन की परंपरा
श्रीनगर गढ़वाल के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर धार्मिक आयोजन चरम पर है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और कथा का श्रवण कर रहे हैं।
मंदिर में वर्ष 2013 से अलग-अलग पुराणों के वाचन की परंपरा जारी है।
मंदिर में व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने बताया कि वर्ष 2013 में गणेश महापुराण के वाचन से इस आयोजन की शुरुआत हुई थी।
इसके बाद भगवान गणेश की कृपा से हर वर्ष अलग-अलग पुराण और धार्मिक कथाओं का आयोजन करने की परंपरा बनाई गई।

गणेश महापुराण से शुरू हुआ आयोजन
आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल के अनुसार गणेश महापुराण के बाद केदारखंड, रामकथा, नारद पुराण
और मत्स्य पुराण सहित कई धार्मिक कथाओं का आयोजन मंदिर में हो चुका है।
कूर्म महापुराण का वाचन भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का संबंध प्राचीन काल से माना जाता है।
मान्यता के अनुसार इस क्षेत्र में देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों की तपस्या से जुड़ी परंपराएं रही हैं।
भगवान गणेश को इस क्षेत्र में गणाध्यक्ष पद की प्राप्ति से भी जोड़ा जाता है।
कूर्म महापुराण में सृष्टि और धर्म का वर्णन
इस वर्ष गणेश मंदिर में कूर्म महापुराण का आयोजन किया जा रहा है।
आचार्य घिल्डियाल ने बताया कि कूर्म महापुराण 18 महापुराणों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, वंश परंपरा, सर्ग और प्रतिसर्ग का विस्तार से वर्णन मिलता है।
उन्होंने बताया कि पुराण में भगवान सूर्य से राम तक की वंश परंपरा और चंद्रवंश से भगवान कृष्ण के अवतार तक की कथा का वर्णन किया गया है।
इसके साथ ही सृष्टि की उत्पत्ति और भगवान नारायण से ब्रह्मा के प्रकट होने का प्रसंग भी बताया गया है।
आचार्य के अनुसार कूर्म महापुराण मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का मार्ग समझाता है।
इसमें धर्म को जीवन का आधार बताते हुए अर्थ और काम के साथ मोक्ष की प्राप्ति की अवधारणा को भी समझाया गया है।
लेखिका बीते ढाई दशक से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हैं.वर्ष 2015 से रीजनल रिपोर्टर के संपादक के पद पर कार्यरत हैं.













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