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दिल्ली में प्रदर्शन के लिए 3 नए मैदान, जंतर-मंतर बंद

कहीं 1.21 लाख खर्च तो कहीं लंबा सफर

दिल्ली में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को अब जंतर-मंतर के बजाय तीन नए मैदानों का रुख करना होगा।

दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और शाहदरा के CBD ग्राउंड को निर्धारित प्रदर्शन स्थल बनाया है।

लेकिन नई व्यवस्था में प्रदर्शनकारियों के सामने दूरी, बुकिंग और खर्च की चुनौतियां भी हैं।

रामलीला मैदान में एक दिन के बड़े आयोजन के लिए शुरुआती भुगतान करीब 1.21 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

ऐसे में सवाल है कि नई व्यवस्था में आम लोगों और छोटे संगठनों के लिए विरोध दर्ज कराना कितना आसान होगा।

दिल्ली में प्रदर्शन के लिए कहां जाना होगा

दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, अब तीन मैदानों में प्रदर्शन किए जा सकेंगे।

इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं।

इन स्थलों को चुनने के पीछे भीड़ प्रबंधन, यातायात और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्रमुख वजह बताया गया है।

हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति और आयोजन की विस्तृत प्रक्रिया से जुड़े नए नियम अलग से जारी किए जाने हैं।

रामलीला मैदान: करीब 1.21 लाख रुपये तक शुरुआती भुगतान

रामलीला मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है। यह जंतर-मंतर से करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित है।

लगभग 12 एकड़ में फैले इस मैदान में करीब 50 हजार लोगों के जुटने की क्षमता बताई जाती है।

यहां लंबे समय से राजनीतिक रैलियां और बड़े जन आंदोलन होते रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने भी 2013, 2015 और 2020 में इसी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

लेकिन बड़े प्रदर्शन के लिए यहां बुकिंग कराना महंगा पड़ सकता है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक दिन की बुकिंग का शुरुआती भुगतान करीब 1.21 लाख रुपये है।

इसमें लगभग 50 हजार रुपये किराया, 55 हजार रुपये वापसी योग्य सिक्योरिटी राशि और टैक्स शामिल हैं। बुकिंग के लिए दिल्ली पुलिस की अनुमति भी जरूरी है।

मैदान का छोटा हिस्सा करीब 150 लोगों के लिए मुफ्त उपलब्ध हो सकता है।

वहीं, दिसंबर में बुकिंग के लिए 29, 30 और 31 तारीख ही खाली बताई गई हैं। इससे बड़े आयोजनों के लिए तारीख और बजट, दोनों की चुनौती सामने आती है।

बुराड़ी ग्राउंड: सबसे बड़ा मैदान, लेकिन दूरी ज्यादा

उत्तर-पश्चिम दिल्ली में स्थित बुराड़ी ग्राउंड करीब 50 एकड़ में फैला है। यह जंतर-मंतर से लगभग 18 से 20 किलोमीटर दूर है।

तीनों नए स्थलों में यह सबसे बड़ा मैदान है। यहां 50 हजार से अधिक लोगों के जुटने की क्षमता बताई जाती है।

बड़ी रैलियों के लिए पर्याप्त जगह होना इसकी खासियत है। हालांकि, शहर के केंद्र से दूरी प्रदर्शनकारियों के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है।

उन्हें आने-जाने में ज्यादा समय और पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

मैदान की उपलब्धता भी आयोजन की तारीख और वहां होने वाली अन्य गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

CBD ग्राउंड: पूर्वी दिल्ली में नया प्रदर्शन स्थल

शाहदरा क्षेत्र का CBD ग्राउंड विकास मार्ग के आसपास स्थित है।

यह जंतर-मंतर से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर है। लगभग 12 एकड़ में फैले इस मैदान के आसपास रिहायशी इलाके, बाजार, मॉल, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं।

यहां बड़े प्रदर्शन होने पर यातायात और स्थानीय कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

हालांकि, मैदान में कितने लोगों को जुटने की अनुमति मिलेगी और बुकिंग के लिए क्या शुल्क देना होगा,

इसकी विस्तृत जानकारी नई प्रक्रिया जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से क्यों हटाया गया

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर एक हजार से अधिक लोगों के जुटने से आसपास की सड़कों पर भीड़ बढ़ जाती है।

इससे यातायात प्रभावित होता है और सुरक्षा प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ती है।

आसपास संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठान होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को भी अहम वजह बताया गया है।

इससे पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से ऐसी जगह तय करने को कहा था, जहां पानी, शौचालय और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने तीन नए स्थलों की घोषणा की। इन मैदानों पर प्रदर्शन की अनुमति और संचालन से जुड़े विस्तृत नियम अभी जारी होने बाकी हैं।

नई व्यवस्था में प्रदर्शन करना कितना आसान

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है।

अब नए मैदानों पर जाने से प्रदर्शनकारियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी।

रामलीला मैदान में बड़े आयोजन का खर्च अधिक है, बुराड़ी ग्राउंड दूर है और CBD ग्राउंड के आसपास भीड़ प्रबंधन की चुनौती है।

ऐसे में नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदर्शनकारियों को अनुमति कितनी

आसानी से मिलती है और निर्धारित स्थलों तक पहुंचना कितना व्यावहारिक रहता है।

प्रदर्शन के लिए जगह तय करना पहला कदम है, लेकिन अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए उस जगह तक पहुंच और आयोजन का खर्च भी उतना ही अहम है।

https://regionalreporter.in/uttarakhand-new-governor-dhal-singh-bisen/
https://youtu.be/2GhRDtqQKaw?si=VCbFQ9FBD0pPpD4B
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