प्रो. एम.एम.सेमवाल
हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल में गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को “भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विशेष सन्दर्भ में”
विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र अत्यंत गरिमामय और शैक्षिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन उपयोगिता को
रेखांकित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साथ उसके समन्वय पर सार्थक विमर्श की भूमिका तैयार करना रहा।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इसके बाद विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया, जिससे सभागार में गरिमा और एकात्मता का वातावरण बना।
मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र और तुलसी पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. अनु राही ने किया।
प्रो. सुनीता गोदियाल ने रखा स्वागत उद्बोधन
औपचारिक सत्र की शुरुआत प्रो. सुनीता गोदियाल, अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग द्वारा स्वागत उद्बोधन से हुई।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शिक्षा को दिशा देने वाली जीवंत परम्परा है।
इसके बाद संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अमरजीत सिंह ने विषय की अवधारणा रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनर्स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुख्य अतिथि ने बताया NEP 2020 को भारतीयता से युक्त
मुख्य अतिथि प्रो. मुरली मनोहर पाठक, माननीय कुलपति, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,
नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पूर्व शिक्षा नीतियों की
तुलना में अधिक समग्र और भारतीयता से युक्त है। उन्होंने ‘मेधा’, ‘विवेक’ और ‘नैतिकता’ को भारतीय शिक्षा का मूल आधार बताया।
उन्होंने “Power of Retention” और “Power of Discrimination” की अवधारणाओं को उदाहरण सहित स्पष्ट करते हुए
कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है, जिसमें ज्ञान का सही समय, स्थान और परिस्थिति के अनुसार उपयोग किया जाए।

भारतीय ज्ञान परम्परा की व्यावहारिक उपयोगिता पर व्याख्यान
अतिथि विशिष्ट प्रो. राज शरण शाही ने अपने उद्घाटन व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परम्परा की दार्शनिक गहराई और व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन आत्मकेंद्रित होते हुए भी सामाजिक और मानवीय कल्याण से गहराई से जुड़ा है।
कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने बताई उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका
सत्र की अध्यक्षता प्रो. श्री प्रकाश सिंह, माननीय कुलपति, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने की।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने इस प्रकार के अकादमिक आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।
उत्तराखण्ड की रामलीला पर विशेष दृश्यात्मक प्रदर्शनी
उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. पुनीता गुप्ता, प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, आदिति महाविद्यालय,
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा “उत्तराखण्ड की रामलीला: एक दृश्य यात्रा” विषय पर विशेष दृश्यात्मक प्रदर्शनी का परिचय कराया गया।
इस प्रदर्शनी में उत्तराखण्ड की समृद्ध लोकनाट्य परम्परा को चित्रों और दृश्य माध्यमों से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसमें विशेष रूप से शामिल रहे-
- वेशभूषा एवं रंग शैली की विशिष्टता
- परम्परा से आधुनिकता तक मंचीय विकास
- महिलाओं की बढ़ती सहभागिता
- मुखौटा नाट्य परम्परा
- शोधकर्ताओं के क्षेत्रीय अनुभव
इस प्रस्तुति ने प्रतिभागियों को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत अनुभव कराया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन
अंत में प्रो. अनिल कुमार नौटियाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
उन्होंने सभी अतिथियों, विद्वानों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

















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