सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत प्रस्तावित नई लाइब्रेरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
कोर्ट ने मौजूदा सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के विशाल पुस्तक संग्रह को नई इमारत में रखने की व्यवस्था पर जानकारी मांगी है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि करीब दो लाख किताबें दिल्ली के आरके पुरम में कार्टन में रखी हैं।
ये किताबें वर्ष 2011 से अब तक खोली नहीं गई हैं।
इस जानकारी के बाद कोर्ट ने लाइब्रेरी के मौजूदा संग्रह और नई प्रस्तावित इमारत में पुस्तकों के लिए उपलब्ध स्थान का पूरा ब्योरा मांगा।
नई इमारत में किताबों के लिए कितनी जगह?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि नई इमारत में
कॉन्फ्रेंस रूम और अन्य सुविधाओं के लिए जगह तय करने के बाद लाइब्रेरी के संग्रह के लिए पर्याप्त स्थान बचेगा या नहीं।
कोर्ट की चिंता सिर्फ किताबों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखने तक सीमित नहीं है।
सवाल यह भी है कि इतने बड़े संग्रह को सुरक्षित रखने और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था कैसे होगी।
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी करीब 135 साल पुरानी है।
लंबे समय में यहां बड़ी संख्या में किताबों के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज और संदर्भ सामग्री भी एकत्र हुई है।
ऐसे में पुस्तक संग्रह का संरक्षण और उसका रिकॉर्ड बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2011 से कार्टन में बंद हैं दो लाख किताबें
आरके पुरम में वर्षों से कार्टन में रखी करीब दो लाख किताबों को लेकर भी स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं।
लंबे समय से बंद इन पुस्तकों की उपलब्धता और रखरखाव की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता जरूरी है।
नई व्यवस्था में केवल पुस्तकों को रखने के लिए जगह उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं होगा।
उनके सुरक्षित संरक्षण, सूचीबद्ध करने और जरूरत पड़ने पर पाठकों तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत सरकारी कार्यालयों और भवनों का पुनर्विकास किया जा रहा है।
इसी प्रक्रिया में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर सवाल सामने आए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अब मौजूदा लाइब्रेरी के संग्रह और नई इमारत में प्रस्तावित जगह का विस्तृत ब्योरा मांगा है।
अगली सुनवाई में केंद्र की ओर से दी जाने वाली जानकारी से यह स्पष्ट होगा कि लाइब्रेरी के विशाल संग्रह को लेकर क्या व्यवस्था प्रस्तावित है।


















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