दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को मिलेगी नई मजबूती, जल्द होगी 150 और शिक्षकों की भर्ती
श्रीनगर गढ़वाल में विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के अंतर्गत आयोजित समारोह में
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 69 सहायक अध्यापक (एलटी) विशेष शिक्षा को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड का पहला ऐसा प्रयास है, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
डॉ. रावत ने कहा कि दिव्यांग अभ्यर्थियों की परिस्थितियों को देखते हुए
उन्हें उनकी पसंद के अनुसार तैनाती देने का प्रयास किया जाएगा।
तीन दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनकी पसंद के स्थान पर नियुक्ति दी जाएगी।

इन जिलों में हुई नियुक्तियां
नियुक्त किए गए 69 विशेष शिक्षा एलटी शिक्षकों की तैनाती विभिन्न जिलों में की गई है।
- पौड़ी – 21
- टिहरी – 17
- देहरादून – 9
- उत्तरकाशी – 8
- रुद्रप्रयाग – 4
- हरिद्वार – 1
हर हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में होगा विशेष शिक्षक
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में कम से कम एक विशेष शिक्षा शिक्षक उपलब्ध कराना है, ताकि दिव्यांग बच्चों को भी समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को नियमित रूप से विशेष शिक्षण सहयोग दिया जाएगा और उनकी शिक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
भाजपा सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में लाई पारदर्शिता
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में राज्य सरकार ने सबसे पहले सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता सुनिश्चित की।
यही कारण है कि आज प्रदेश में शिक्षकों की नियमित भर्ती तेजी से हो रही है और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी लगातार दूर की जा रही है।

जल्द होगी 150 एलटी शिक्षकों की नई भर्ती
डॉ. रावत ने बताया कि हाईकोर्ट में लंबित मामला सुलझने के बाद 150 एलटी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
जल्द ही कटऑफ सूची जारी होगी और अगले 15 से 20 दिनों के भीतर नियुक्तियां पूरी कर दी जाएंगी।
स्कूलों में शौचालय और पेयजल की बेहतर व्यवस्था
उन्होंने बताया कि प्रदेश के लगभग 22 हजार विद्यालयों में से लगभग सभी विद्यालयों में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था की जा चुकी है। यदि कहीं बारिश या अन्य कारणों से कार्य अधूरा रह गया है तो उसे भी जल्द पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 21,800 से अधिक विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है।
केवल 176 विद्यालय ऐसे हैं, जहां पेयजल व्यवस्था का कार्य शेष है और उसे भी शीघ्र पूरा किया जाएगा।

हर स्कूल में स्मार्ट क्लास और व्यावसायिक शिक्षा
डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक विद्यालय में स्मार्ट क्लास शुरू करना है।
इसके साथ ही 1,000 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकें।
जीजीआईसी श्रीनगर में बनेगा सेंट्रल किचन
उन्होंने घोषणा की कि श्रीनगर स्थित जीजीआईसी परिसर में लगभग ₹12–13 करोड़ की लागत से आधुनिक सेंट्रल किचन बनाया जाएगा। इसका भूमि पूजन 15 अगस्त के बाद किया जाएगा।
इस किचन से क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
साथ ही भोजन माताओं को बेहतर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मेधावी छात्रों और माताओं को मिल रहा प्रोत्साहन
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
कक्षा 6 से 12 तक 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
इसके साथ ही इस वर्ष 17 हजार से अधिक माताओं को भी सम्मानित किया गया है।
‘सुपर-100’ योजना से मिलेगी IIT और NEET की तैयारी
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ‘सुपर-100’ योजना चला रही है, जिसके तहत चयनित विद्यार्थियों को IIT, NEET और MBBS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग दी जा रही है।
इसके अलावा 250 से अधिक विद्यार्थियों को भारत भ्रमण भी कराया जा रहा है,
जिससे उनका शैक्षणिक और सांस्कृतिक अनुभव समृद्ध हो सके।
10 से 15 अगस्त तक चलेगी तिरंगा यात्रा
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि 10 से 15 अगस्त के बीच पूरे प्रदेश के विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लगभग 30 लाख विद्यार्थी तिरंगा यात्रा में भाग लेंगे।
उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपने घरों पर भी तिरंगा फहराने का आह्वान किया।
‘हमारी विरासत, हमारी विभूतियां’ पुस्तक से जुड़ेंगे विद्यार्थी
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को राज्य के महान व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए “हमारी विरासत, हमारी विभूतियां” नामक पुस्तक तैयार की गई है।
इससे नई पीढ़ी अपने राज्य के महान लोगों और इतिहास को बेहतर ढंग से जान सकेगी।

डिग्री समारोह में स्वदेशी परिधान को बढ़ावा
डॉ. रावत ने कहा कि पहले दीक्षांत समारोहों में विदेशी गाउन पहनने की परंपरा थी, जिसे बदलकर उत्तराखंड में स्वदेशी परिधान को बढ़ावा दिया गया।
उन्होंने बताया कि इस विषय पर कानूनी चुनौती भी आई, लेकिन बाद में न्यायालय ने भी स्वदेशी परिधान के उपयोग को उचित माना। अब राज्य के दीक्षांत समारोहों में स्वदेशी परिधान को प्राथमिकता दी जा रही है।
















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