‘रीजनल रिपोर्टर’ के तत्वावधान में सर्राफ धर्मशाला में आयोजित गरिमामय समारोह में वरिष्ठ
साहित्यकार, सेवानिवृत शिक्षक डॉ. विष्णुदत्त कुकरेती के अभिनंदन ग्रंथ “स्वाध्याय से सिद्धि तक” का विधिवत लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
“स्वाध्याय से सिद्धि तक” का औपचारिक विमोचन
समारोह में रीजनल रिपोर्टर के तत्वावधान में प्रकाशित अभिनंदन ग्रंथ “स्वाध्याय से सिद्धि तक” का औपचारिक एवं गौरवपूर्ण विमोचन किया गया।
यह ग्रंथ डॉ. विष्णुदत्त कुकरेती के दीर्घ साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को समर्पित है।
ग्रंथ का भावपूर्ण वाचन, समीक्षा में जीवन प्रसंगों का उल्लेख
कार्यक्रम में अध्यापिका सरिता उनियाल द्वारा ग्रंथ का भावपूर्ण वाचन किया गया। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार
उमा घिल्डियाल ने ग्रंथ की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए डॉ. कुकरेती के जीवन से जुड़े मार्मिक प्रसंग साझा किए।
उन्होंने बताया कि बाल्यावस्था में उन्हें ‘लाटा’ कहकर पुकारा जाता था
“अच्छा इंसान होना सबसे बड़ी उपलब्धि” – प्रो. मंजुला राणा
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मंजुला राणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्वान होना
बड़ी बात नहीं, बल्कि ऐसा इंसान होना अधिक महत्वपूर्ण है जिसके साथ लोग स्वयं को सुरक्षित महसूस करें।
उन्होंने कहा कि डॉ. कुकरेती के व्यक्तित्व में उन्होंने यही मानवीय गुण अनुभव किए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि “स्वाध्याय से सिद्धि तक” जैसे अभिनंदन ग्रंथ के प्रकाशित हो जाने के बाद अब गढ़वाल विश्वविद्यालय के सामने एक नई चुनौती भी है।
विश्वविद्यालय को चाहिए कि वह डॉ. कुकरेती के साहित्यिक, वैचारिक और सामाजिक योगदान पर शोध कार्यों को प्रोत्साहित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके कार्यों से प्रेरणा ले सकें।
उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक अवसर बताया।
“श्री की नगरी है आध्यात्मिक भूमि ” – डॉ. विष्णुदत्त कुकरेती
अभिनंदन ग्रंथ के लोकार्पण अवसर पर डॉ. विष्णुदत्त कुकरेती ने आत्मानुभूति से ओतप्रोत उद्बोधन देते हुए कहा कि श्रीनगर की भूमि की अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा है।
यदि व्यक्ति अपनी आदतों में थोड़ा सुधार कर ले तो बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने शंकराचार्य के श्रीनगर से सिद्धि प्राप्त करने का भी उल्लेख किया।
विचारोत्तेजक वक्तव्य और साहित्यिक संवाद
कार्यक्रम में एडवोकेट कृष्णानंद मैथानी ने भी अपने विचार रखते हुए साहित्य, समाज और मूल्यबोध
पर सारगर्भित वक्तव्य दिया। समारोह में साहित्यिक संवाद और चिंतन का वातावरण बना रहा।
साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और विद्यार्थियों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर भैरव दत्त असनोड़ा, प्रदीप अणथ्वाल, सीताराम बहुगुणा, परवेज़ अहमद, हरिवंदर सिंह, देवेंद्र गौड़,
सुनील सिल्सवाल, धनवीर सिंह, हेमंत चौकियाल, अनुज बडोनी, पीसी चक्रवर्ती, एडवोकेट बी. थपलियाल,
हरि प्रसाद उनियाल, आमोद थपलियाल, पुनोद चंद्र नौडियाल, मुकेश सेमवाल सहित एमएसडब्ल्यू, बीएससी
पत्रकारिता विभाग के छात्र एवं शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

साहित्यिक विरासत के संरक्षण का संकल्प
समारोह का समापन साहित्यिक विरासत के संरक्षण, नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने और डॉ. विष्णुदत्त कुकरेती के
रचनात्मक योगदान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ किया गया।
उपस्थित वक्ताओं ने इसे श्रीनगर के साहित्यिक जीवन का एक स्मरणीय क्षण बताया।
















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