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हरेला सप्ताह के तहत सुवाकोट में 10 हजार पौधों का रोपण, हरित हिमालय अभियान को मिली नई गति

उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ की पंचाचूली

कंपनी ने सोमवार को वड्डा के समीप सुवाकोट में विशाल वृक्षारोपण अभियान चलाया। अभियान के तहत 10 हजार पौधों का

रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित हिमालय के संकल्प को मजबूती दी गई।

बड़ी संख्या में लोगों ने निभाई सहभागिता

वृक्षारोपण अभियान में बटालियन के अधिकारियों और सैनिकों के साथ पूर्व सैनिकों, स्थानीय ग्रामीणों, कैलाश आश्रम विद्यालय,

शिशु विद्या मंदिर वड्डा तथा विश्व भारती पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से अभियान जनआंदोलन का रूप लेता नजर आया।

स्थानीय जलवायु के अनुरूप लगाए गए पौधे

अभियान के दौरान आम, अनार, अमरूद, लीची, नींबू, बाँज, मणिपुरी बाँज, चिनार, देवदार, सुरई और कचनार सहित विभिन्न

फलदार एवं स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इन पौधों का चयन हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता बढ़ाने, भू-क्षरण रोकने

और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया।

हरेला सप्ताह में अब तक 50 हजार पौधों का रोपण

बटालियन ने बताया कि हरेला सप्ताह के विशेष अभियान के तहत अब तक 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं।

यह अभियान वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 8 लाख पौधों के वार्षिक लक्ष्य से अलग स्वैच्छिक रूप से संचालित किया जा रहा

है, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति बटालियन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

‘हरेला प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक’

इस अवसर पर बटालियन के अधिकारियों ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, जिम्मेदारी

और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने सभी सहभागी संस्थाओं,

विद्यालयों, पूर्व सैनिकों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण का आह्वान किया।

16 जुलाई को होगा अभियान का समापन

बटालियन का यह विशेष वृक्षारोपण अभियान 16 जुलाई 2026 को हरेला पर्व के अवसर पर भव्य समापन कार्यक्रम के साथ

पूरा होगा। इस दौरान कुल 70 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बटालियन का मानना है कि यह पहल

कुमाऊँ हिमालय की पारिस्थितिकी को मजबूत करने, हरित आवरण बढ़ाने और जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण

को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

https://regionalreporter.in/phd-entrance-exam-controversy-in-garhwal-university/
https://youtu.be/_Cw5-uZdA7A?si=-dGx039ssilMPLAl
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