गढ़वाल विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के दौरान हुए हंगामे के बाद छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर
सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से विश्वविद्यालय की साख और यहां अध्ययनरत छात्रों की छवि को
नुकसान पहुंचा है।
छात्र नेताओं ने मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय में हुई सभी शिक्षक एवं प्रशासनिक नियुक्तियों के साथ-साथ
पीएचडी में हुए सभी प्रवेशों की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच पारदर्शी ढंग से कराई
जाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि नियुक्तियां और प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई हैं या नहीं।
छात्र नेताओं का आरोप है कि लगातार उठ रहे सवालों और विवादों के कारण विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा हो
रहा है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि छात्रों और आम जनता का विश्वविद्यालय
प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।















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