द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट आगामी 21 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
इसी बीच पंच कारबारियान हक-हकूकधारी समिति गौण्डार ने लोक निर्माण विभाग के
अधिशासी अभियन्ता को ज्ञापन सौंपकर यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने की मांग की है।
समिति ने कहा कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु मदमहेश्वर धाम की यात्रा पर पहुंचते हैं,
लेकिन मार्गों की खराब स्थिति यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है।
अकतोली–गौण्डार मोटर मार्ग जल्द पूरा करने की मांग
समिति के पदाधिकारियों ने निर्माणाधीन अकतोली–गौण्डार मोटर मार्ग को शीघ्र पूर्ण करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि यह मार्ग समय पर पूरा हो जाता है तो यात्रा मार्ग अधिक सुगम और सुरक्षित बन सकेगा।
समिति के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान बेहतर सड़क सुविधा से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी
और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
पैदल मार्ग की खराब स्थिति पर जताई चिंता
जोसरी धार से देवी मंदिर तक जाने वाले पैदल मार्ग की खराब स्थिति को लेकर भी समिति ने चिंता व्यक्त की।
बताया गया कि यह मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिससे यात्रियों को फिसलन,
संकरी पगडंडियों और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है।
समिति ने यात्रा शुरू होने से पहले इस मार्ग के चौड़ीकरण और मरम्मत को अत्यंत आवश्यक बताया है।
स्थानीय लोगों की आजीविका भी जुड़ी
समिति अध्यक्ष शिवानन्द पंवार ने कहा कि यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों की आजीविका भी इसी मार्ग पर निर्भर रहती है।
यदि मार्ग सुगम होगा तो न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार और पर्यटन को भी लाभ मिलेगा।
समिति सचिव वीरेन्द्र पंवार ने लोक निर्माण विभाग से अपील की कि मदमहेश्वर धाम यात्रा को ध्यान में
रखते हुए सभी पैदल मार्गों और निर्माणाधीन मोटर मार्ग को समय पर दुरुस्त किया जाए।
चल विग्रह उत्सव डोली को भी हो सकती है परेशानी
प्रधान अनूप पंवार ने बताया कि अकतोली–गौण्डार मोटर मार्ग के निर्माण कार्य के चलते प्राचीन पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुका है।
ऐसे में जोसरी धार से देवी मंदिर तक पैदल मार्ग का ट्रीटमेंट अनिवार्य है,
ताकि भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली को ऊखीमठ से धाम ले जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
देख-रेख समिति सरपंच जसपाल सिंह पंवार ने कहा कि निर्माणाधीन मोटर मार्ग और पैदल रास्तों को सुगम बनाने का लाभ तीर्थ यात्रियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी मिलेगा।















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