महादेवी वर्मा जयंती पर बड़ा संदेश: “अनुवाद के बिना संभव नहीं विश्व साहित्य”
कुमाऊँ विश्वविद्यालय के रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजनपीठ में आयोजित
12वें महादेवी वर्मा स्मृति व्याख्यान में अनुवाद की वैश्विक भूमिका पर गहन चर्चा हुई।
इस अवसर पर साहित्यकारों ने एक स्वर में कहा कि अनुवाद के बिना विश्व साहित्य की कल्पना अधूरी है।
“अनुवाद ही बनाता है हमें वैश्विक नागरिक”
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी से सम्मानित कवि-लेखक सरबजीत गरचा ने मुख्य व्याख्यान देते हुए कहा कि “अनुवाद केवल भाषाओं के बीच सेतु नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अलग-अलग भाषाओं में अपने विचार व्यक्त करता है,लेकिन अनुवाद ही उन्हें एक-दूसरे से जोड़ता है। यही प्रक्रिया हमें वैश्विक नागरिक बनाती है।
समकालीन कविता के सरोकारों पर भी हुई चर्चा
व्याख्यान में वैश्विक कविता के प्रमुख विषयों जैसे पहचान, विस्थापन, युद्ध, प्रतिरोध और डिजिटल कविता पर भी चर्चा की गई।
गरचा ने अज्ञेय, कुँवर नारायण, केदारनाथ सिंह और मंगलेश डबराल जैसे हिंदी कवियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं और विदेशी भाषाओं के बीच व्यापक अनुवाद कार्य हुआ है।
“हिंदी में अनुवाद की मजबूत परंपरा”
विशिष्ट अतिथि प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि हिंदी में विश्व साहित्य के अनुवाद की समृद्ध परंपरा रही है।
उन्होंने बताया कि दुनिया के लगभग सभी प्रमुख कवियों के अनुवाद हिंदी में उपलब्ध हैं, जिससे साहित्य का वैश्विक प्रसार संभव हुआ है।
अनुवाद से मिलता है साहित्य को नया दृष्टिकोण
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. चन्द्रकला रावत ने कहा कि अनुवाद से हिंदी साहित्य
को नई दृष्टि और व्यापक आयाम मिले हैं।
वहीं, सृजनपीठ के निदेशक प्रो. शिरीष कुमार मौर्य ने स्वागत संबोधन में अनुवाद को विश्व साहित्य का मजबूत आधार बताया।
संवाद सत्र और सम्मान समारोह भी आयोजित
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों और मुख्य वक्ता के बीच संवाद आयोजित किया गया।
इससे पहले दीप प्रज्वलन और महादेवी वर्मा के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
अतिथियों का स्वागत शॉल, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया।
बड़ी संख्या में विद्वानों की उपस्थिति
इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय रामगढ़ के प्राचार्य डाॅ. नगेन्द्र द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीश कुमार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल आर्य सहित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ. सुचित्रा अवस्थी, डाॅ. राजेन्द्र कैड़ा, डाॅ. अनिल कार्की, डाॅ. कुमार मंगलम सहित डाॅ. शशि पाण्डे, डाॅ. कंचन आर्या, डाॅ. मथुरा इमलाल, डाॅ. माया शुक्ला, डाॅ. हरीश चन्द्र जोशी, डाॅ. संध्या गड़कोटी, डाॅ. नीमा पंत, डाॅ. संदीप तिवारी, डाॅ. शिव प्रकाश त्रिपाठी, सविता वर्मा, हिमांशु डालाकोटी, निर्मला कपिल, अरूणेश शुक्ल, कृष्ण चन्द्र जोशी, नंदकिशोर जोशी, महेश जोशी, हिमांशु विश्वकर्मा, ललित मोहन, सृष्टि गंगवार, शिवानी शर्मा, देवेंद्र कुमार, रोहित रौतेला, धनंजय पाठक, गुंजिता पंत, पाखी पाण्डे, प्रकृति सिंह, बहादुर सिंह कुँवर, ललित नेगी समेत कई शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। इस दौरान कई प्राध्यापक, साहित्यकार और गणमान्य लोग मौजूद रहे।




















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