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सरोकारों से साक्षात्कार

उत्तराखंड में दायित्व बंटे, सियासत गरमाई

कैबिनेट विस्तार के बाद तेज हुई नियुक्तियां, संगठन को साधने की रणनीति मानी जा रही

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बार फिर पार्टी कार्यकर्ताओं

को साधने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

विभिन्न बोर्ड, परिषदों और समितियों में नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपते हुए

सरकार ने दायित्वों का पिटारा खोल दिया है, जिससे लंबे समय से इंतजार कर रहे कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

कैबिनेट विस्तार के बाद तेज हुई दायित्व वितरण प्रक्रिया

हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाने के लिए

दायित्व वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम संगठन को मजबूत करने

और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिहाज से अहम है।

कई परिषदों और समितियों में नई नियुक्तियां

सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार विभिन्न परिषदों और समितियों में कई अहम नियुक्तियां की गई हैं-

  • विनोद सुयाल को युवा कल्याण सलाहकार परिषद का उपाध्यक्ष
  • ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष
  • खेम सिंह चौहान को पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद का उपाध्यक्ष
  • चारु कोठारी को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का उपाध्यक्ष
  • कुलदीप बुटोला को राज्य स्तरीय खेल परिषद का अध्यक्ष
  • सोना सजवाण को हर्बल सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष
  • हरिप्रिया जोशी को राज्य महिला आयोग का उपाध्यक्ष

लंबे इंतजार के बाद मिला ‘दायित्वों का तोहफा’

काफी समय से पार्टी कार्यकर्ता इन नियुक्तियों का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में अप्रैल महीने की शुरुआत में आई इस सूची को ‘दायित्वों का तोहफा’ माना जा रहा है।

संगठन में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दिए जाने से कार्यकर्ताओं में संतोष का माहौल है।

संगठन और सरकार के बीच संतुलन की कोशिश

राजनीतिक दृष्टि से इन नियुक्तियों को सरकार और संगठन के बीच संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

आमतौर पर कैबिनेट विस्तार के बाद संगठन से जुड़े नेताओं को बोर्ड, निगम और परिषदों में समायोजित किया जाता है, ताकि उन्हें भी शासन में भागीदारी मिल सके।

आने वाले समय में और नियुक्तियों के संकेत

सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया अभी जारी है और आने वाले समय में कई अन्य बोर्ड और निगमों में भी नियुक्तियां की जा सकती हैं।

इससे उन कार्यकर्ताओं को भी मौका मिल सकता है, जो अब तक इस सूची से बाहर हैं।

https://regionalreporter.in/dehradun-brigadier-murder-case-encounter-arrest/
https://youtu.be/GEbVe5JHHn4?si=C1VorDs1KxAoqsE1
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