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शिक्षा जगत के समर्पित स्तंभ, प्रधानाध्यापक जगदीश राज हुए सेवानिवृत्त

भैरव दत्त असनोडा

गैरसैंण (चमोली): जनपद चमोली के शिक्षा विभाग में चार दशकों के एक गौरवशाली अध्याय का आज समापन हो गया। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (रा.जू.हा.) सारकोट में तैनात प्रधानाध्यापक जगदीश लाल राज अपनी लगभग 40 वर्षों की निस्वार्थ सेवा के पश्चात आज, 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

1986 से 2026: संघर्ष और सफलता का सफर

​ जगदीश राज की शैक्षणिक यात्रा 10 सितंबर 1986 को रा.प्रा.वि. नैणी से शुरू हुई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों में अपनी सेवाएँ दीं

  • प्रारंभिक सेवा: नैणी के बाद आपने रा.प्रा.वि. सैंजी (1987-89) में कार्य किया।
  • पदोन्नति व विस्तार: 1989 में आ प्रधानाध्यापक के रूप में मुसा उडियार (नारायणबगड़) पहुँचे। तत्पश्चात रा.जू.हा. पज्याणाखाल और मयखोली में सहायक अध्यापक के रूप में लंबे समय तक शिक्षण कार्य किया।
  • प्रशासनिक भूमिका: आपने अपनी कार्यकुशलता का परिचय ‘समन्वय संकुल’ के रूप में अगरचट्टी (2004-09) और रोहिणा (2009-18) में भी दिया।
  • अंतिम पड़ाव: सेवा के अंतिम 8 वर्ष (2018-2026) आपने रा.जू.हा. सारकोट में प्रधानाध्यापक के रूप में व्यतीत किए, जहाँ विद्यालय के अनुशासन और शैक्षिक सुधार हेतु आपको सदैव याद किया जाएगा।

प्रेरणादायक पारिवारिक पृष्ठभूमि

​ जगदीश राज ने न केवल समाज को शिक्षित किया, बल्कि अपने परिवार को भी उच्च आदर्शों पर आगे बढ़ाया। आपकी धर्मपत्नी मंगला देवी के सहयोग से परिवार ने विशिष्ट उपलब्धियां प्राप्त की हैं

  • ​बड़े पुत्र सुनील राज वर्तमान में एसडीएम (SDM), द्वाराहाट के पद पर कार्यरत हैं।
  • ​पुत्रवधू उपासना राज एक पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) हैं।
  • ​अन्य संतान, धर्मेंद्र राज और आकांक्षा राज वर्तमान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

भावभीनी विदाई विद्यालय परिसर में आयोजित विदाई समारोह में सहकर्मियों और स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें सम्मानित किया। वक्ताओं ने उन्हें सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बताया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों और सहयोगियों ने उनके सुखद एवं स्वस्थ भविष्य की कामना करते हुए उन्हें विदाई दी।

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